देवघर दौरा: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने झारखंड के देवघर में राज्य स्तरीय विधिक सेवा-सह-सशक्तीकरण शिविर को संबोधित किया।
बाबा बैद्यनाथ धाम में पूजा: कार्यक्रम से पहले CJI ने देश के प्रसिद्ध 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक, बाबा बैद्यनाथ धाम में विधिवत पूजा-अर्चना की।
वर्चुअल उद्घाटन: पलामू और रांची में नए कानूनी सहायता केंद्रों का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया गया।
देवघर. भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने झारखंड के देवघर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान न्यायपालिका और कानूनी सहायता प्रणाली को लेकर एक अत्यंत संवेदनशील और प्रेरणादायक संदेश दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की न्यायपालिका को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े तबके के लोगों को ठीक उसी प्रकार से कानूनी सहायता मिले, जैसे किसी अस्पताल में गंभीर मरीज का इलाज किया जाता है।
देवघर में आयोजित राज्य स्तरीय विधिक सेवा-सह-सशक्तीकरण शिविर को संबोधित करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत की न्यायपालिका—तालुका और जिला अदालतों से लेकर उच्च न्यायालयों तथा उच्चतम न्यायालय तक—गरीबों के दर्द को गहराई से समझे और उसका त्वरित समाधान करे।
उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि जब कोई मरीज अस्पताल पहुंचता है, तो वहां की नर्सें और तकनीशियन उसे तुरंत यह भरोसा दिलाते हैं कि उसका सही इलाज होगा। उन्होंने कहा, “जब तक डॉक्टर मरीज के पास पहुंचते हैं, उसकी आधी बीमारी तो वैसे ही ठीक हो जाती है।” इसी तर्ज पर, कानूनी सहायता पेशेवरों और विधिक स्वयंसेवकों को भी समाज के गरीबों, बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और शारीरिक रूप से अशक्त व्यक्तियों तक खुद पहुंचना चाहिए और उन्हें मजबूत कानूनी सुरक्षा का अहसास कराना चाहिए।
इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्य न्यायाधीश ने झारखंड के पलामू और रांची जिलों में अत्याधुनिक कानूनी सहायता केंद्रों का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन भी किया। इस पहल से दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले जरूरतमंदों को त्वरित न्याय और सहायता मिलने में काफी आसानी होगी। कार्यक्रम से पहले CJI ने देश के 12 प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंगों में शुमार बाबा बैद्यनाथ धाम में पहुंचकर बाबा भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की और देश की सुख-शांति व न्याय व्यवस्था के सुदृढ़ होने की कामना की।


