नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के रोहिणी स्थित डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर अस्पताल में चिकित्सा जगत को झकझोर देने वाली एक बेहद गंभीर और दर्दनाक लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां अपेंडिक्स के ऑपरेशन के बाद 26 वर्षीय युवक आशीष की इलाज के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस घटना ने सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि जब आशीष का ऑपरेशन किया गया, तब अस्पताल के सीनियर सर्जन करवाचौथ के अवकाश पर थे। उनकी गैरमौजूदगी में जूनियर डॉक्टरों ने कथित तौर पर ऑनलाइन कंसल्टेशन के सहारे ही मरीज की सर्जरी कर डाली। परिजनों का कहना है कि बिना वरिष्ठ और अनुभवी डॉक्टरों की प्रत्यक्ष देखरेख के इस तरह जटिल ऑपरेशन करना सीधे तौर पर मरीज की जिंदगी से खिलवाड़ है।
सर्जरी के कुछ ही देर बाद आशीष की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। उसे लगातार उल्टियां होने लगीं और पेट में असहनीय दर्द शुरू हो गया। परिजनों का आरोप है कि जब वे गंभीर हालत में डॉक्टर के पास पहुंचे, तो वार्ड में कोई सीनियर डॉक्टर मौजूद नहीं था। बार-बार गुहार लगाने के बाद जब मरीज को आपातकालीन (इमरजेंसी) विभाग में शिफ्ट किया गया, तो वहां का जीवन रक्षक मॉनीटर भी खराब हालत में मिला। इस दौरान आशीष करीब दो घंटे तक दर्द से तड़पता रहा, लेकिन समय पर उचित इलाज नहीं मिल सका।
हालत अत्यधिक नाजुक होने पर अस्पताल प्रशासन ने जल्दबाजी में एक और ऑपरेशन किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अंततः अगली सुबह चार बजे डॉक्टरों ने आशीष को मृत घोषित कर दिया।
परिजनों की मांगें
निष्पक्ष जांच: घटना की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए।
दस्तावेजों की मांग: दोनों ऑपरेशनों के मेडिकल रिकॉर्ड, ड्यूटी रोस्टर और ऑपरेशन थिएटर के फुटेज साझा किए जाएं।
कड़ी कार्रवाई: इस घोर लापरवाही के लिए जिम्मेदार दोषी चिकित्सकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
इस हृदयविदारक घटना से परिवार में कोहराम मचा हुआ है और वे न्याय के लिए अस्पताल प्रशासन के खिलाफ लगातार गुहार लगा रहे हैं।


