झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस एके चौधरी की अदालत में ईडी अधिकारियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की याचिका पर सुनवाई हुई।
राज्य सरकार द्वारा समय पर जवाब दाखिल न किए जाने पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताते हुए 8 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है।
हर्जाने की यह राशि झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) के पास जमा करनी होगी।
इस मामले की अगली सुनवाई अब 9 दिसंबर 2026 को होगी।
रांची. राजधानी रांची से एक बड़ी कानूनी और राजनीतिक खबर सामने आ रही है। झारखंड हाई कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी (FIR) के मामले में जवाब दाखिल नहीं करने पर राज्य सरकार पर 8 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। न्यायमूर्ति एके चौधरी की अदालत में इस मामले पर सोमवार को सुनवाई हुई। अदालत ने राज्य सरकार के रवैये पर नाराजगी जताते हुए यह आर्थिक दंड लगाया है और जुर्माने की राशि झालसा (झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार) में जमा करने का निर्देश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद 31 जनवरी 2024 को शुरू हुआ था, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रांची के एससी-एसटी थाने में ईडी के कई अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इस एफआईआर में ईडी के अधिकारी कपिल राज, देवव्रत झा, अनुपम कुमार, अमन पटेल और अन्य अज्ञात लोगों को नामजद किया गया था।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि ईडी के अधिकारियों ने उन्हें 29 से 31 जनवरी 2024 तक रांची में रहने के लिए बाध्य किया और इसी दौरान उनकी अनुपस्थिति में दिल्ली स्थित उनके आवास पर बिना किसी पूर्व सूचना के छापेमारी की गई। मुख्यमंत्री की ओर से यह भी आरोप लगाया गया था कि इस केंद्रीय कार्रवाई के कारण उन्हें मानसिक व सामाजिक रूप से प्रताड़ित किया गया तथा मीडिया के माध्यम से भ्रामक सूचनाएं फैलाकर उनकी छवि को धूमिल करने का प्रयास किया गया।
अदालत का रुख और अगली तारीख
इस मामले को निराधार बताते हुए ईडी के अधिकारियों (कपिल राज, देवव्रत झा व अन्य) ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की है। इसी याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार से जवाब मांगा था। हालांकि, सरकार की ओर से निर्धारित समय पर जवाब दाखिल नहीं किया गया, जिसके बाद कोर्ट ने यह सख्त कदम उठाया।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रतिवादी हेमंत सोरेन पर दस रुपये का हर्जाना लगाया था। अब इस चर्चित मामले में अगली सुनवाई 9 दिसंबर को निर्धारित की गई है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। अदालत की इस सख्ती से राज्य प्रशासनिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है।


