नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर से 1984 के सिख विरोधी दंगों की टीस और राजनीतिक पारा अपने चरम पर पहुंच गया है। एक तरफ जहां कांग्रेस पार्टी द्वारा एक खास राजनीतिक कार्यक्रम के आयोजन की तैयारी है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसके विरोध में आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। दिल्ली भाजपा ने एलान किया है कि आगामी 1 नवंबर को पश्चिमी दिल्ली के सिख बहुल क्षेत्र हरिनगर में एक विशाल विरोध मार्च निकाला जाएगा, जिसमें 1984 के दंगों के पीड़ित और हजारों की संख्या में सिख समाज के लोग सीधे तौर पर शामिल होंगे।
सिख समाज के जख्म आज भी हरे
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि 1984 में हुए वे खौफनाक दंगे ऐसे थे, जिन्हें सिख समुदाय आज भी नहीं भूला सका है। 31 अक्टूबर से 3 नवंबर तक का वह काला दौर सिख परिवारों के लिए जिंदगी का सबसे पीड़ादायक और काला अध्याय रहा है। उस दौरान न केवल हजारों बेकसूर सिखों को मौत के घाट उतार दिया गया था, बल्कि उनके घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी चुन-चुनकर लूटा और आग के हवाले किया गया था। भाजपा नेताओं का स्पष्ट तौर पर कहना है कि आज भी पीड़ित परिवारों को पूर्ण न्याय का इंतजार है।
राजनीतिक रीलॉंच और माफी की मांग
भाजपा ने कांग्रेस पार्टी पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया है कि एक नवंबर का दिन चुनकर एक बार फिर से सिख समाज की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई जा रही है। पार्टी नेताओं का तर्क है कि राहुल गांधी के राजनीतिक पुनरुत्थान या रीलॉंच से पहले कांग्रेस को 1984 के भीषण नरसंहार के लिए बिना शर्त सिख समाज से माफी मांगनी चाहिए। पिछले कुछ दिनों से विभिन्न सिख संस्थाओं के प्रबंधक और समाज के प्रमुख लोग लगातार भाजपा नेताओं से मुलाकात कर इस पूरे घटनाक्रम पर अपना कड़ा विरोध दर्ज करा रहे थे, जिसके बाद यह बड़ा विरोध मार्च निकालने का निर्णय लिया गया।
व्यापारियों और आम जनता की बढ़ी चिंताएं
इस सियासी घमासान और प्रस्तावित रैली के बीच दिल्ली के स्थानीय व्यापारियों और आम नागरिकों की धड़कनें भी तेज हो गई हैं। दिवाली के ठीक मुहाने पर इस तरह के बड़े राजनीतिक आयोजनों से राजधानी के बाजारों में भारी भीड़ और भयंकर ट्रैफिक जाम लगने की आशंका जताई जा रही है, जिससे लगभग 12,000 करोड़ रुपये के त्योहारी कारोबार के प्रभावित होने का खतरा मंडरा रहा है। इसके अलावा, एक नवंबर से पुराने वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध जैसे नियमों के चलते भी आम लोगों को आवाजाही में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। बहरहाल, इस विरोध मार्च ने एक बार फिर से राष्ट्रीय राजधानी की राजनीति को गर्मा दिया है।


