रांची. झारखंड की प्रशासनिक और चयन व्यवस्था को हिला देने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और ओएमआर शीट में हेराफेरी को लेकर सीआइडी की जांच ने कई चौंकाने वाले राजफाश किए हैं। सीआइडी द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट के अनुसार, आयोग द्वारा आयोजित कुल 36 परीक्षाओं में से 9 परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली के पुख्ता सबूत मिले हैं, जबकि अन्य मामलों की जांच अभी भी जारी है।
जांच में यह बात खुलकर सामने आई है कि जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते, तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता और परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी टीडीपीएल (TDPL) के एक सिंडिकेट ने मिलकर आयोग को पूरी तरह बंधक बना लिया था। इस सुनियोजित सिंडिकेट ने न केवल प्रतियोगिता परीक्षाओं में सरेआम सीटें बेचीं, बल्कि करोड़ों रुपये का अवैध लेन-देन भी किया।
महत्वपूर्ण परीक्षाओं में सीधे तौर पर पेपर लीक करने, ओएमआर शीट में हेराफेरी करने, खाली ओएमआर शीट में बाद में गोले भरने और परीक्षा केंद्रों के बाहर उत्तर पुस्तिकाएं लिखवाने जैसे गंभीर गैरकानूनी कार्य किए गए।
सीआईडी की चार्जशीट के दायरे में 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षा, 14वीं झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा, वन क्षेत्र पदाधिकारी (एफआरओ), सहायक वन संरक्षक (एसीएफ), बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) और झारखंड पात्रता परीक्षा (जेईटी) जैसी कई प्रमुख परीक्षाएं शामिल हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि पूर्व अध्यक्ष के आवास और ठिकानों से कई अभ्यर्थियों के नाम और रोल नंबर वाले सेटिंग चार्ट भी बरामद हुए हैं, जिससे यह साबित होता है कि परीक्षाओं के परिणाम आने से पहले ही चयन तय हो जाते थे।


