पटना. बिहार की राजनीति में इन दिनों उथल-पुथल मची हुई है, जिसका केंद्र मोकामा से बाहुबली विधायक अनंत सिंह हैं। हाल ही में संपन्न हुए विधान परिषद चुनावों के दौरान पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर बगावती तेवर दिखाने के कारण सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने उनके खिलाफ कड़ा एक्शन लिया है। पार्टी आलाकमान ने अनुशासनहीनता और खुलेआम विरोध के आरोप में अनंत सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। इस राजनीतिक ड्रामे के बाद से राज्य का सियासी पारा सातवें आसमान पर है और हर तरफ इसी घटना की चर्चा हो रही है।
एमएलसी चुनाव में बगावत और निष्कासन की पृष्ठभूमि
इस पूरे राजनीतिक विवाद की शुरुआत हाल ही में संपन्न हुई विधान परिषद की 8 सीटों के चुनावों से हुई। पार्टी ने पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से नीरज कुमार को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया था। लेकिन मोकामा के विधायक अनंत सिंह ने पार्टी के इस निर्णय के विपरीत जाकर बागी तेवर अपना लिए। उन्होंने जेडीयू उम्मीदवार का समर्थन करने के बजाय ‘जन सुराज’ पार्टी के प्रत्याशी अनुज सिंह के पक्ष में खुलकर प्रचार किया। यही नहीं, वे अनुज सिंह की नामांकन यात्रा में भी शामिल हुए। पार्टी के भीतर रहकर इस तरह का खुला विरोध जेडीयू नेतृत्व को नागवार गुजरा, जिसके परिणामस्वरूप पार्टी ने फौरन कार्रवाई करते हुए अनंत सिंह को बाहर का रास्ता दिखा दिया।
अनंत सिंह का तीखा हमला: “जेडीयू 12 सीटों पर सिमट जाएगी”
पार्टी से निकाले जाने के बाद विधायक अनंत सिंह ने मीडिया से बातचीत में अपने चिरपरिचित दबंग अंदाज में तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने जेडीयू नेतृत्व पर कड़ा प्रहार करते हुए भविष्यवाणी की कि आगामी विधानसभा चुनावों में जेडीयू केवल 12 सीटों पर सिमट कर रह जाएगी। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि पार्टी को अपनी इस कार्रवाई का परिणाम जल्द ही समझ आ जाएगा और उन्हें अपनी “औकात का पता चल जाएगा।” हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने पार्टी के भीतर कोई गलत काम नहीं किया है, लेकिन यदि पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया है, तो इससे उन्हें कोई खास फर्क नहीं पड़ता।
नीतीश कुमार से जुड़ाव और नेतृत्व पर सवाल
एक तरफ जहां अनंत सिंह ने जेडीयू के वर्तमान फैसलों और पार्टी की मौजूदा कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए, वहीं उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति अपनी निष्ठा बरकरार रखी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस पार्टी का निर्माण किया था, लेकिन आज कुछ अन्य लोग इसे चला रहे हैं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए सवाल उठाया कि जब पार्टी के असली संस्थापक ही इसे सही से संचालित नहीं कर पा रहे हैं, तो मौजूदा अन्य नेतृत्व की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। इसके साथ ही, उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि वह हमेशा से नीतीश कुमार के साथ रहे हैं और आगे भी उनके साथ ही खड़े रहेंगे, भले ही वह अब पार्टी के सदस्य नहीं रहे।
राजनीतिक भविष्य और भविष्य के संकेत
पार्टी से निकाले जाने के बाद अनंत सिंह के आवास पर उनके समर्थकों द्वारा आतिशबाजी कर जश्न मनाए जाने की खबरें भी सामने आई हैं, जो राज्य की स्थानीय राजनीति में अजीबोगरीब समीकरणों की ओर इशारा करती हैं। हालांकि, जब उनसे यह पूछा गया कि क्या वह भविष्य में किसी अन्य राजनीतिक दल का दामन थामेंगे, तो उन्होंने फिलहाल इस पर खुलकर बोलने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि राजनीति की असली मालिक जनता है और सही समय आने पर जनता ही उनकी अगली राजनीतिक दिशा तय करेगी। बहरहाल, इस निष्कासन के बाद बिहार की सियासत में नए समीकरण बनने के कयास लगाए जाने लगे हैं और आने वाले दिनों में यह विवाद सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।


