जामताड़ा (झारखंड): मोहब्बत की कोई सरहद नहीं होती, लेकिन समाज की दीवारें अक्सर दिलों को तोड़ देती हैं। झारखंड के जामताड़ा जिले से एक ऐसी ही झकझोर देने वाली और दिल को चीर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने इंसानियत और सामाजिक रूढ़ियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विद्यासागर रेलवे स्टेशन और मदनकट्टा स्टेशन के बीच डाउन लाइन पर शनिवार सुबह एक प्रेमी जोड़े का खून से सना शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।
मृतकों की पहचान रिंगेचिंगो गांव निवासी रॉकी मंडल और नाजिया खातून के रूप में हुई है। यह दर्दनाक अंत यूं ही नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे दो साल पुराना वह सामाजिक दबाव और जुदाई का दर्द था, जिसने इन दोनों की जिंदगी को असमय छीन लिया।
दो साल पहले पंचायत ने कराया था अलग
ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, रॉकी और नाजिया लंबे समय से एक-दूसरे से प्रेम करते थे। लेकिन दोनों के अलग-अलग समुदाय से होने के कारण करीब दो साल पहले गांव में एक तुगलकी फरमान जैसी पंचायत बुलाई गई थी। इस पंचायत ने दोनों को एक होने से रोक दिया और बलपूर्वक अलग करने का फैसला सुनाया। इतना ही नहीं, लड़के पक्ष पर जुर्माना भी लगाया गया था। इसके बाद, दबाव में आकर करीब एक वर्ष पूर्व नाजिया के परिजनों ने उसकी शादी दूसरे स्थान पर कर दी थी।
शादी के बाद भी नहीं भूला प्यार, मौत को लगाया गले
परिजनों और ग्रामीणों के मुताबिक, शादी के बाद भी नाजिया का अपने मायके आना-जाना लगा रहा और दोनों के बीच का संपर्क खत्म नहीं हुआ। समाज की पाबंदियां उनके प्यार को मिटा नहीं पाईं। शुक्रवार रात करीब 12 बजे से रॉकी अपने घर से लापता था। सुबह होते-होते रेलवे ट्रैक पर दोनों के शव मिलने की खबर ने सभी को सन्न कर दिया। घटनास्थल के पास ही एक बाइक, उनके मोबाइल फोन, जूते और एक सोने का लॉकेट बरामद हुआ है।
फिलहाल पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जामताड़ा भेज दिया है और मामले की गहराई से जांच कर रही है। यह घटना इस बात की एक कड़वी सच्चाई बयां करती है कि आज भी समाज में जाति और मजहब की दीवारें कितने मासूमों की जान ले रही हैं।


