मुंबई. दीवाली और धनतेरस जैसे बड़े त्योहारों से ठीक पहले सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में आई भारी गिरावट ने निवेशकों और खरीदारों दोनों को असमंजस में डाल दिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख के चलते वैश्विक स्तर पर कीमती धातुओं पर भारी दबाव बना हुआ है।
मुख्य कारण और वैश्विक दबाव
वैश्विक मोर्चे पर, मध्य-पूर्व के तनाव ने ऊर्जा की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है, जिससे ब्रेंट क्रूड ऑयल 117 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों से पैसा निकलकर अमेरिकी बॉन्ड की तरफ जाने से ट्रेजरी बॉन्ड का रिटर्न बढ़ गया है। बॉन्ड यील्ड में इस उछाल और अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने सोने की चमक को फीका कर दिया है, क्योंकि सोने जैसी धातुओं से कोई नियमित ब्याज आय नहीं होती है। चांदी पर औद्योगिक मांग में मंदी का दोहरा असर पड़ा है, जिससे इसके वायदा भाव में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
भारतीय बाजार और निवेशकों का रुख
इसके विपरीत, घरेलू मोर्चे पर तस्वीर कुछ अलग है। हालांकि चांदी के अनुभवों ने निवेशकों को निराश किया है, लेकिन सोने ने पिछले साल के मुकाबले अब भी बेहतर रिटर्न दिया है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, ऊंचे दामों और त्योहारी सीजन के चलते लोग जमकर खरीदारी कर रहे हैं। इसके अलावा, गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs) में लगातार होल्डिंग बढ़ना यह साबित करता है कि दीर्घकालिक निवेशक अभी भी मुद्रास्फीति और भू-राजनीतिक जोखिमों से बचाव के लिए सोने को सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं।
निष्कर्ष स्पष्ट है कि अमेरिकी मौद्रिक नीतियों और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण शॉर्ट-टर्म में कीमतों पर दबाव बना रहेगा, लेकिन त्योहारी और शादी के सीजन की घरेलू मांग तथा केंद्रीय बैंकों की खरीदारी ने बाजार में एक संतुलन बनाए रखा है।


