नई दिल्ली: भारतीय प्रेस परिषद (Press Council of India – PCI) ने देश में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों, धरनों और आंदोलनों की कवरेज के दौरान मीडियाकर्मियों की सुरक्षा, जवाबदेही और पेशेवर आचरण को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और कड़ा निर्देश जारी किया है। प्रेस काउंसिल ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि रिपोर्टिंग के उत्साह या लाइव प्रसारण (Live Broadcast) के दबाव में आकर पत्रकार अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता न करें। परिषद द्वारा जारी ये दिशा-निर्देश देश के सभी मीडिया संस्थानों, संपादकों और मैदानी स्तर पर काम करने वाले पत्रकारों (चाहे वे स्थायी हों या फ्रीलांसर) पर समान रूप से लागू होते हैं।
प्रमुख चेतावनियां और दिशा-निर्देश एक नजर में
1. पहचान और पेशेवर आचरण (प्रमाणिकता अनिवार्य)
पहचान पत्र हमेशा प्रदर्शित हो: पत्रकारों को अपना वैध प्रेस पहचान पत्र हर समय स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाली जगह पर लगाना अनिवार्य है। यदि इसे गले में लैनयार्ड (फीते) से पहना गया है, तो भीड़ या झड़प के दौरान इसके फंसने के खतरे को देखते हुए विशेष सावधानी बरतें।
तटस्थता बनाए रखें: विरोध प्रदर्शनों या धरनों के दौरान पत्रकार केवल एक दर्शक और रिपोर्टर की भूमिका निभाएं। किसी भी पक्ष का समर्थन करने, प्रदर्शन में भाग लेने या पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हस्तक्षेप करने से सख्त परहेज करें। तनावपूर्ण स्थितियों में पुलिस अधिकारियों के वैध निर्देशों का पालन करें और अनावश्यक बहस से बचें।
2. सुरक्षित स्थान और भीड़ प्रबंधन (जान है तो जहान है)
सुरक्षित दूरी रखें: टकराव या तनाव बढ़ने की स्थिति में पुलिस की कार्रवाई से उचित और सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
उपकरणों से बाधा न हो: कैमरे, माइक या अन्य रिकॉर्डिंग उपकरण पुलिस की बैरिकेडिंग या आधिकारिक वाहनों पर इस प्रकार बिल्कुल न लगाएं जिससे यातायात या कानून व्यवस्था प्रभावित हो। भीड़ के बीच चलते समय सचेत रहें ताकि भगदड़ या गिरने की स्थिति से बचा जा सके।
3. आपातकालीन स्थिति और प्राथमिक उपचार किट
इमरजेंसी किट अनिवार्य: मैदानी कवरेज पर जाने वाले पत्रकारों के पास प्राथमिक उपचार (First Aid) की सामग्री, जरूरी दवाएं, पीने का पानी, हल्का नाश्ता, टॉर्च, और आंखों की सुरक्षा के लिए गॉगल्स या चश्मा होना चाहिए।
खतरनाक वस्तुओं से दूरी: चेतावनी दी गई है कि आंसू गैस के गोले, फ्लैश-बैंग या धुआँ पैदा करने वाले ग्रेनेड को भूलकर भी न छुएं और न ही उठाने की कोशिश करें, क्योंकि वे अत्यधिक गर्म हो सकते हैं या उनमें विस्फोट का खतरा रहता है।
4. सुरक्षा उपकरणों का उपयोग और लाइव प्रसारण पर लगाम
सुरक्षा सर्वोपरि: जरूरत पड़ने पर सिर की सुरक्षा के लिए हेलमेट और शरीर के बचाव के लिए अन्य सुरक्षात्मक उपकरण (कवच) का उपयोग करें। हालांकि, सुरक्षा उपकरणों के भरोसे अनावश्यक जोखिम लेने की अनुमति नहीं है।
लाइव कवरेज की सीमाएं: यदि पुलिस की वास्तविक समय की रणनीतिक गतिविधियों, तैनाती या सुरक्षित निकलने के गुप्त रास्तों के प्रसारण से सुरक्षा खतरे में पड़ती है, तो ऐसी संवेदनशील जानकारी प्रसारित करने से सख्त मना किया गया है। लाइव फुटेज या एक्सक्लूसिव कवरेज के दबाव को अपनी जान और सुरक्षा पर हावी बिल्कुल न होने दें।
5. न्यूज़रूम और सहयोगियों से समन्वय
लोकेशन की जानकारी साझा करें: मीडिया संस्थान एक ऐसे जिम्मेदार व्यक्ति को नियुक्त करें जो फील्ड में मौजूद पत्रकारों की लोकेशन पर लगातार नजर रखे। वहीं, फ्रीलांसर पत्रकारों को भी अपनी रिपोर्टिंग योजना और संभावित वापसी के समय की जानकारी अपने किसी भरोसेमंद सहयोगी या संपादक को अवश्य देनी चाहिए।
पत्रकारिता की गरिमा और नैतिकता सर्वोपरि
प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने याद दिलाया है कि सनसनीखेज रिपोर्टिंग से बचते हुए केवल सत्यापित तथ्यों को ही आधार बनाया जाना चाहिए। बच्चों, घायलों, और संकट में फंसे आम नागरिकों की पहचान उजागर करते समय उनकी निजता का पूरा सम्मान करें। सभी मीडियाकर्मियों से इन नियमों का पूरी सख्ती और जिम्मेदारी के साथ पालन करने का अनुरोध किया गया है।


