जमशेदपुर/करनडीह.
भारतीय निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार चल रहे विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान पूर्वी सिंहभूम जिले के जमशेदपुर प्रखंड सह अंचल कार्यालय में प्रशासनिक लचरता की पोल खुल गई है. हजारों ‘विसंगति’ (डिफेक्टिव) मतदाताओं को नोटिस जारी होने के बाद से करनडीह स्थित कार्यालय परिसर में रोजाना अफरा-तफरी और कोहराम का माहौल है.
बिना किसी पूर्व सुनियोजित कार्ययोजना और दिशा-निर्देश के सीधे आम जनता को नोटिस थमाकर कार्यालय बुलाए जाने से व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, जिससे लोकतंत्र के इस महत्वपूर्ण पर्व में आम नागरिकों की भागीदारी उत्पीड़न में बदलती नजर आ रही है.
बीएलओ स्तर की अनदेखी और कार्यालय में उमड़ी भीड़
मतदाता सूचियों के विशेष पुनरीक्षण अभियान के तहत यह उम्मीद की जा रही थी कि जमीनी स्तर पर बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) के माध्यम से त्रुटियों को सुधारा जाएगा. स्थानीय नागरिकों ने संवाददाताओं को अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि यदि फॉर्म संशोधन का यह प्राथमिक कार्य स्थानीय स्तर पर ही बीएलओ के जरिए कराया जाता, तो जनता को इस प्रकार की जिल्लत नहीं झेलनी पड़ती.
नियमतः स्थानीय स्तर पर फॉर्म दुरुस्त होने के बाद सुपरवाइजर वेरिफिकेशन और अंतिम रूप से फॉर्म जमा करने की प्रक्रिया को अंचल कार्यालय में सुनियोजित किया जाना चाहिए था. इसके विपरीत, अंचल प्रशासन ने बिना किसी ठोस आंतरिक व्यवस्था के सीधे नोटिस भेजकर भारी भीड़ को सीओ ऑफिस में इकठ्ठा कर दिया. परिणामस्वरूप, कार्यालय परिसर में प्रतिदिन लगने वाली अनियंत्रित भीड़ किसी मेले जैसी प्रतीत हो रही है, जहाँ अफरा-तफरी के अलावा प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह नतमस्तक नजर आ रहा है.
मार्गदर्शन के अभाव में भटक रहे मतदाता
अंचल कार्यालय के भीतर स्थिति यह है कि नोटिस पाकर पहुंचे अधिकांश मतदाताओं को यह तक नहीं सूझ रहा है कि उन्हें वास्तव में करना क्या है, फॉर्म कैसे भरा जाना है और इसके साथ कौन-कौन से आवश्यक दस्तावेज संलग्न करने हैं.
कार्यालय में न तो कोई हेल्प डेस्क है और न ही प्रक्रिया को समझाने वाला कोई सक्षम कर्मी. मतदाता अपने फॉर्म और रिपोर्ट को सही तरीके से भर पाने में असमर्थ हैं. अधिकारी और कर्मचारी इस जटिल प्रक्रिया को ठीक से समझा पाने में पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं. नतीजतन, मतदाताओं के फॉर्म बार-बार गलत हो रहे हैं और उन्हें अपने दैनिक कामकाज छोड़कर बार-बार अंचल कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं. आम जनता का स्पष्ट आरोप है कि प्रशासनिक अमला इस गंभीर कार्य में केवल औपचारिकता और ‘खानापूर्ति’ कर रहा है.
वीआईपी कल्चर और मनमानी की भेंट चढ़ी आम जनता की सुगमता
कार्यालय परिसर में जहाँ एक तरफ आम मतदाता सुबह से भूखे-प्यासे लंबी लाइनों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करने को विवश हैं, वहीं दूसरी तरफ ‘पहुंच और पैरवी’ रखने वालों के लिए रास्ते सुगम देखे जा रहे हैं. कई रसूखदार और खास लोग बिना कतार में लगे सीधे अंचलाधिकारी से मिलकर अपना काम निपटाकर आसानी से निकलते देखे गए. इस दोहरे रवैये ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर गहरा प्रश्नचिह्न लगा दिया है. घंटों धक्के खाने के बावजूद कई मतदाता बिना फॉर्म वेरीफाई कराए ही क्षुब्ध मन से बैरंग लौटने को मजबूर हो रहे हैं. भीड़ और अराजकता के इस आलम के बीच अंचलाधिकारी भी खुद को पूरी तरह असमर्थ बताते हुए मूकदर्शक की भूमिका में नजर आए, जिससे आम जनता में प्रशासन के प्रति भारी रोष व्याप्त है.
जनप्रतिनिधियों ने जतायी नाराजगी
इस गंभीर अराजकता और प्रशासनिक नाकामी का संज्ञान लेते हुए जमशेदपुर प्रखंड प्रमुख पानी सोरेन के नेतृत्व में पंचायत समिति सदस्यों के एक प्रतिनिधिमंडल ने अंचलाधिकारी मनोज कुमार के कार्यालय में उसने मुलाकात की.
प्रखंड प्रमुख पानी सोरेन ने कहा कि विसंगति मतदाताओं के लिए कार्यालय स्तर पर कोई भी मानवीय या ठोस व्यवस्था नहीं की गई है. अंचल प्रशासन ने हजारों मतदाताओं को उनके हाल पर छोड़ दिया है. इस मामले में उपायुक्त से शिकायत करने की बात भी कही गयी है.
इस मौके पर सतबीर सिंह बग्गा, सुनील गुप्ता, झरना मिश्रा, पंकज महतो, सोनिया भूमिज, मनोज यादव, सुशील कुमार, संतोष ठाकुर सहित कई प्रमुख पंचायत समिति सदस्य सीओ कार्यालय में मौजूद रहे जो लोगों को सहयोग कर रहे थे.




