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Home » बागबेड़ा जलापूर्ति योजना: पेयजल अभियंता और ठेकेदार की सांठगांठ से 1.88 करोड़ का प्रोजेक्ट फ्लॉप, क्यों ठप हो रही बार-बार जलापूर्ति!
झारखंड

बागबेड़ा जलापूर्ति योजना: पेयजल अभियंता और ठेकेदार की सांठगांठ से 1.88 करोड़ का प्रोजेक्ट फ्लॉप, क्यों ठप हो रही बार-बार जलापूर्ति!

Kumari PriyankaBy Kumari PriyankaSeptember 18, 2026
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अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, जरूरत है पूरे प्रोजेक्ट की स्वीकृति से लेकर कार्यादेश, मापी पुस्तिका, भुगतान और पानी की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराने की. संवेदक और संबंधित लापरवाह अधिकारियों की भूमिका तय करते हुए उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की, ताकि करोड़ों के इस खेल का पर्दाफाश हो सके और जनता को उनका अधिकार मिल सके.

जमशेदपुर. बागबेड़ा हाउसिंग कॉलोनी के 1140 क्वार्टरों में रहने वाले हजारों लोग आज भी शुद्ध और नियमित पेयजल के लिए तरस रहे हैं. बिष्टुपुर में करीब 1.88 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से नया फिल्टर पंप हाउस बनकर तैयार हुआ, लेकिन इसके बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है. पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अभियंताओं की अनदेखी, ठेकेदार की मनमानी और व्यवस्था के संचालन का जिम्मा संभालने वाले जनप्रतिनिधियों के साथ स्थानीय नेताओं के संदिग्ध मौन ने इस पूरी योजना को भ्रष्टाचार के दलदल में धकेल दिया है.

हाल ही में पंचायत समिति सदस्य सुनील गुप्ता और श्रवण मिश्रा के नेतृत्व में स्थानीय लोगों ने उपायुक्त राजीव रंजन को 15 सूत्री मांग पत्र सौंपा. लेकिन इस मांग पत्र के पीछे बागबेड़ा जलापूर्ति की जो कड़वी सच्चाई छिपी है, वह सरकारी तंत्र और ठेकेदारी प्रथा के नापाक गठजोड़ की ओर इशारा करती है. अब इस मामले में महती जिम्मेदारी कार्यपालक अभियंता शिव कुमार दिनकर पर आती है जिनको सच और झूठ के बीच दूध का दूध और पानी का पानी करना है.

ठेकेदार की मनमानी और भ्रष्टाचार की नई गाथा

पेयजल विभाग के फंड से बिष्टुपुर में निर्मित नया फिल्टर पंप हाउस अब तकनीकी खामियों और भ्रष्टाचार का नया ठिकाना बन चुका है. नियमों के मुताबिक, जिस ठेकेदार को इस प्लांट के निर्माण का काम सौंपा गया था, उसी के कंधों पर अगले कुछ वर्षों तक इसके संचालन, रखरखाव और मरम्मत की भी जिम्मेदारी दी गई थी. लेकिन धरातल पर स्थिति यह है कि प्लांट चालू होने के बाद से आज तक बागबेड़ा के लोगों को एक दिन भी स्वच्छ और पर्याप्त जलापूर्ति नसीब नहीं हुई.

आलम यह है कि हर दूसरे-तीसरे दिन कोई न कोई छोटी-बड़ी तकनीकी खराबी सामने आ जाती है. कभी मोटर खराब हो जाती है, तो कभी फुटबॉल्व या पाइपलाइन में लीकेज की समस्या आ खड़ी होती है. संप (Sump) और पानी की टंकियों की सफाई तक नहीं की जा रही है. तकनीकी रूप से कमजोर निर्माण और गुणवत्ताहीन उपकरणों के इस्तेमाल के कारण यह पूरा प्लांट एक सफेद हाथी साबित हो रहा है.

1.88 करोड़ का नया पंप हाउस फिर भी पानी गुल, बागबेड़ा में आखिर कब खत्म होगा भ्रष्टाचार का खेल?

बागबेड़ा जलापूर्ति योजना पर जनप्रतिनिधियों का मौन क्यों? जर्जर टंकी और दूषित पानी से सेहत पर संकट

अभियंताओं और ‘जलपुरुषों’ का संदिग्ध मौन

सवाल यह उठता है कि जब करोड़ों रुपये का जनधन पानी की तरह बहाया जा रहा था, तब पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अभियंता क्या कर रहे थे? निर्माण कार्य के प्राक्कलन (Estimate), मापी पुस्तिका (Measurement Book) और गुणवत्ता की जांच किए बिना ही ठेकेदार को भुगतान कैसे कर दिया गया?

इससे भी बड़ा सवाल बागबेड़ा के उन स्थानीय नेताओं और जनप्रतिनिधियों पर उठता है, जो खुद को क्षेत्र में ‘जलपुरुष’ और जनता का मसीहा बताकर प्रचारित करते हैं. जब नया प्लांट बन रहा था और जलापूर्ति व्यवस्था का संचालन ठेकेदार को सौंपा जा रहा था, तब ये जनप्रतिनिधि कहां थे? क्या इनकी निगरानी सिर्फ कागजों तक सीमित थी? जनप्रतिनिधियों के इस रहस्यमयी मौन ने ठेकेदार को खुलेआम मनमानी करने का अवसर दिया, जिसका खामियाजा आज पूरी बागबेड़ा कॉलोनी भुगत रही है.

जर्जर पानी टंकी और स्वास्थ्य से खिलवाड़

एक तरफ बिष्टुपुर का नया फिल्टर पंप हाउस बदहाली का शिकार है, तो दूसरी तरफ बागबेड़ा स्थित मुख्य पानी टंकी अत्यंत जर्जर अवस्था में पहुंच चुकी है. बिना किसी प्रशिक्षित ऑपरेटर और रात्रिकालीन व्यवस्था के जलापूर्ति संचालित की जा रही है. प्रयोगशाला से पानी के नमूनों की नियमित जांच तक नहीं होती, जिससे लोगों को गंदा और दूषित पानी पीने पर मजबूर होना पड़ रहा है. भीषण गर्मी और बदलते मौसम में यह स्थिति कॉलोनी के निवासियों के स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ है.

अब सवाल यह उठता है कि क्या बागबेड़ा जलापूर्ति के लिए तैयार किया गया 1.88 करोड़ का प्रोजेक्ट फ्लॉप हो गया है? क्या अभियंताओं और ठेकेदार की सांठगांठ और जनप्रतिनिधियों के मौन ने जलापूर्ति के प्रोजेक्ट को इस स्थिति तक पहुंचा दिया है? अगर ऐसा नहीं है तो क्या कारण है कि करोड़ों खर्च करने के बाद भी बार-बार जलापूर्ति ठप होने की समस्या उत्पन्न हो रही है?

डीसी के कड़े रुख से जगी उम्मीद, जांच की मांग

मामले की गंभीरता को देखते हुए उपायुक्त राजीव रंजन ने पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता शिव कुमार दिनकर को निर्धारित समय पर जलापूर्ति बहाल करने और जर्जर पानी टंकी को जल्द ठीक कराने का कड़ा निर्देश दिया है. डीसी ने स्पष्ट किया है कि यदि समस्या का तत्काल समाधान नहीं हुआ तो एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

स्थानीय निवासियों की अब मांग है कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा. इस पूरे प्रोजेक्ट की स्वीकृति से लेकर कार्यादेश, मापी पुस्तिका, भुगतान और पानी की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराई जाए. साथ ही संवेदक (ठेकेदार) और संबंधित लापरवाह अधिकारियों की भूमिका तय करते हुए उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए, ताकि करोड़ों के इस खेल का पर्दाफाश हो सके और जनता को उनका अधिकार मिल सके.

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मास कम्युनिकेशन ग्रेजुएट कुमारी प्रियंका, OCEAN POST में कंटेंट एडिटर हैं. डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स, कंटेंट राइटिंग और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में गहरी रुचि रखने वाली प्रियंका, खबरों को सही, रोचक और अनुकूल ढंग से प्रस्तुत कर पाठकों को विश्वसनीय कंटेंट से जोड़ने में माहिर हैं.

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