New Delhi. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निदेशक राहुल नवीन ने एजेंसी के जांच अधिकारियों को दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) से जुड़ी उन धोखाधड़ी के मामलों में कार्रवाई तेज करने का निर्देश दिया है, जिनमें भारी ‘हेयरकट” (कर्ज में अत्यधिक छूट) के जरिये प्रवर्तक अपनी संपत्तियां दोबारा हासिल कर लेते हैं। इसके साथ ही उन्होंने उन मामलों में वैकल्पिक कदम उठाने को कहा है, जहां उनके अनुरोध पर पुलिस प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज नहीं करती है। ये दोनों मुद्दे हाल ही में तब चर्चा में आए जब राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की एक विशेष पीठ ने एस्सेल समूह के चेयरमैन सुभाष चंद्रा को अपनी संपत्तियों को स्थानांतरित (बेचने या किसी अन्य के नाम) करने से रोक दिया और एक प्रस्तावित समझौते के मामले में सभी पक्षों को नोटिस जारी किया।
इस समझौते के तहत कर्जदाताओं को 22,006 करोड़ रुपये के दावों के मुकाबले उनकी निजी संपत्ति से महज 6.5 करोड़ रुपये की वसूली की अनुमति मिल रही थी। बाद में सीबीआई ने इस मामले में चंद्रा के खिलाफ मामला दर्ज किया।
विशेष रूप से विपक्ष शासित राज्यों में पुलिस एफआईआर में देरी को लेकर ईडी ने धनशोधन रोधक अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 66(2) के तहत कई पत्र भेजकर अपने निष्कर्षों के आधार पर आपराधिक मामला दर्ज करने को कहा है।


