सुप्रीम कोर्ट के इस गरिमामयी आयोजन के बाद जब रागिनी लौटीं, तो उनके पास शब्दों की कमी थी, लेकिन आंखों में भविष्य के बड़े सपने और अनगिनत मीठी यादें थीं. यह पल इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुका है.
नई दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) परिसर से हाल ही में एक बेहद आत्मीय और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे देश के साथ-साथ विशेष तौर पर बिहार का मस्तक गर्व से ऊंचा कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत को रक्षाबंधन के पावन पर्व पर राखी बांधने वाली 11वीं कक्षा की मेधावी छात्रा रागिनी ओझा मूल रूप से बिहार के सीवान जिले से ताल्लुक रखती हैं.
इस भावुक और ऐतिहासिक पल ने साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी परिचय की मोहताज नहीं होती, और जब बिहार के बच्चे अपनी काबिलियत और संस्कारों के बल पर आगे बढ़ते हैं, तो वे बड़े से बड़े मंच पर अपनी एक अलग अमिट छाप छोड़ जाते हैं.
सीवान के जीरादेई से दिल्ली की उड़ान
दिल्ली के राजकीय सर्वोदय कन्या विद्यालय (पश्चिम विनोद नगर) में विज्ञान संकाय की कक्षा 11 की छात्रा रागिनी ओझा का परिवार मूल रूप से बिहार के सीवान जिले के ऐतिहासिक जीरादेई गांव से जुड़ा हुआ है. देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जन्मस्थली के रूप में विख्यात इसी पावन माटी की पृष्ठभूमि से आने वाली रागिनी पहली बार सर्वोच्च न्यायालय के परिसर में पहुंची थीं.
एक साधारण पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाली इस बेटी के लिए यह किसी सपने के सच होने जैसा था. जब सुरक्षा जांच से गुजरते हुए उनका एस्कॉर्ट वाहन सुप्रीम कोर्ट के मुख्य द्वारों से अंदर दाखिल हुआ, तो उस क्षण मिले सम्मान और गरिमा ने उनके मन पर एक गहरी छाप छोड़ी.
खुद के हाथों से बनाई थी अनूठी राखी
इस रक्षाबंधन पर कुछ अलग और खास करने की ललक लिए रागिनी ने बाजार से रेडीमेड राखी खरीदने के बजाय अपने ही हाथों से एक बेहद खूबसूरत राखी तैयार की थी. इसके बाद, उन्होंने पत्र लिखकर मुख्य न्यायाधीश से मिलने और उन्हें अपने हाथों से बनी यह राखी बांधने की विनम्र इच्छा जताई थी. एक विद्यार्थी की इस मासूम, सरल और स्नेह से भरी अभिव्यक्ति ने CJI न्यायमूर्ति सूर्यकांत का दिल जीत लिया. मुख्य न्यायाधीश ने इस अनूठे अनुरोध को सहजता से स्वीकार करते हुए न केवल सर्वोच्च न्यायालय परिसर स्थित जजेज लाउंज में राखी समारोह आयोजित करने के निर्देश दिए, बल्कि दिल्ली के 20 स्कूली विद्यार्थियों के समूह को वहां आमंत्रित कर उनके साथ यह पर्व भी मनाया.
दिल्ली के राजकीय सर्वोदय कन्या विद्यालय में कक्षा 11 की छात्रा रागिनी ओझा का परिवार मूल रूप से बिहार के सीवान जिले के ऐतिहासिक जीरादेई गांव से जुड़ा हुआ है. देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जन्मस्थली है.
न्यायालय के गलियारों में जीवंत हुए सादगी और संस्कार
सुप्रीम कोर्ट के जजेज लाउंज में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम के दौरान मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने बच्चों के साथ बिना किसी औपचारिकता के खुलकर संवाद किया. रागिनी बताती हैं कि सीजेआई का सरल, सहज और धरातल से जुड़ा व्यक्तित्व उनके लिए बेहद प्रेरणादायी रहा. बिना किसी प्रोटोकॉल के बच्चों के बीच बैठकर उनकी बातें सुनना और जीवन-मूल्यों पर चर्चा करना यह दर्शाता है कि देश के सबसे ऊंचे न्यायिक पद पर बैठे व्यक्ति के भीतर एक संवेदनशील इंसान भी धड़कता है. इस दौरान रागिनी ने मुख्य न्यायाधीश का आत्मीय सान्निध्य प्राप्त करने के साथ-साथ उनके हस्ताक्षर भी हासिल किए, जिसे वह जीवनभर एक अमूल्य धरोहर के रूप में संजोकर रखना चाहती हैं.
बिहार के युवाओं के लिए बनी मिसाल
रागिनी ओझा की यह सफलता और सीजेआई के साथ रक्षाबंधन मनाने का यह दृश्य केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि बिहार के उन तमाम सुदूर गांवों के युवाओं के लिए एक मजबूत संदेश है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं. सीवान के एक साधारण परिवार से निकलकर देश की राजधानी के सर्वोच्च न्यायिक संस्थान तक अपनी पहुंच बनाना और अपनी कला व संस्कारों से सबका मन मोह लेना यह बताता है कि बिहार की युवा पीढ़ी में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है.





