रांची. झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की व्यवस्थाओं में बड़े बदलावों की मांग को लेकर रांची में छात्रों का आंदोलन उग्र रूप धारण कर चुका है. अल्बर्ट एक्का चौक पर मुख्यमंत्री का पुतला फूंकने के दौरान पुलिस और छात्र-छात्राओं के बीच तीखी नोकझोंक के बाद हिंसक झड़प हो गई.
स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है. इस घटनाक्रम के सिलसिले में कोतवाली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 14 प्रमुख छात्र नेताओं को नामजद करने के साथ-साथ लगभग 200 अज्ञात उपद्रवियों के खिलाफ तीन अलग-अलग केस दर्ज किए हैं.
पुतला दहन के दौरान भड़की हिंसा
JPSC-JSSC रिफार्म मंच के नेतृत्व में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में सैकड़ों अभ्यर्थी जमा हुए थे. जब छात्र मुख्यमंत्री का पुतला जलाने लगे, तब मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की. देखते ही देखते दोनों पक्षों में धक्का-मुक्की और तीखी बहस शुरू हो गई.
पुलिस प्रशासन का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने सरकारी कामकाज में बाधा डाली और सुरक्षाकर्मियों से हाथापाई की. स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को खदेड़ना पड़ा. इसके बाद दर्जनों छात्र सदर अस्पताल परिसर पहुंच गए, जहां उनके विरोध प्रदर्शन के कारण सामान्य मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी उठानी पड़ी.
कानूनी शिकंजा और पुलिसिया जांच
इस पूरे प्रकरण में पुलिस की ओर से अंकिता वर्मा, शाहबाज तथा ड्यूटी पर तैनात मजिस्ट्रेट के बयानों पर तीन अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई हैं. नामजद आरोपियों में कुणाल प्रताप, पीयूष, रविंद्र पासवान और चंडी तिवारी समेत 14 आंदोलनकारी शामिल हैं.
पुलिस अधिकारियों के अनुसार घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग और डिजिटल साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है, ताकि अन्य उपद्रवियों की पहचान कर उचित कानूनी कार्रवाई की जा सके.
मुकदमों के बावजूद आंदोलन तेज करने का ऐलान
पुलिसिया कार्रवाई और मुकदमों से बेपरवाह छात्र संगठनों ने कड़ा रुख अपनाया है. छात्र नेताओं का कहना है कि वे भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, समयबद्ध नियुक्तियों और दोनों आयोगों में संरचनात्मक सुधार जैसी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से आवाज उठा रहे थे.
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पुलिस बल का इस्तेमाल कर छात्रों की आवाज दबाना चाहती है. छात्र प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कर दिया है कि इन एफआईआर से उनका आंदोलन थमने वाला नहीं है, बल्कि आने वाले दिनों में वे पूरे प्रदेश में रोजगार और प्रशासनिक सुधार के मुद्दे पर और अधिक उग्र प्रदर्शन करेंगे.
सांसद विद्युत वरण ने घटना की भर्त्सना की
राज्य के विभिन्न जिलों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे प्रतियोगी छात्रों पर हुए पुलिसिया लाठीचार्ज को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. जमशेदपुर के सांसद विद्युत वरण महतो ने घटना की भर्त्सना की है. साकची स्थित भाजपा महानगर कार्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता में उन्होंने हेमंत सोरेन और कांग्रेस गठबंधन सरकार पर युवाओं की लोकतांत्रिक आवाज को बर्बरतापूर्वक कुचलने का गंभीर आरोप लगाया.



