नई दिल्ली. उपभोक्ताओं की पसंद बन चुकी ऑनलाइन कंपनियां अब अपनी सेवाओं में कमी के कारण परेशानी का कारण बनने लगी है. नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (NCH) पर दर्ज आंकड़ों ने ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म्स के दावों की पोल खोलकर रख दी है. आज देश में करोड़ों लोग हर छोटे-बड़े सामान के लिए ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स ऐप्स पर निर्भर हैं, लेकिन ऑर्डर में गड़बड़ी होने पर उपभोक्ताओं को जिस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है, वह गंभीर चिंता का विषय बन चुका है. बोट्स (Bots) के जरिए ऑटोमेटेड जवाब देना, कस्टमर केयर का डायरेक्ट नंबर न मिलना और रिफंड-रिप्लेसमेंट की लंबी प्रक्रियाओं में ग्राहकों को उलझाए रखना अब आम बात हो गई है.
संसद में पेश किए गए ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन पर ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ शिकायतों की बाढ़ आ गई. इन शिकायतों में शीर्ष स्थान पर ई-कॉमर्स दिग्गज फ्लिपकार्ट रही, जिसके खिलाफ अकेले 1.33 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं. इसके बाद अमेजन (91,248) और मीशो (29,284) का नंबर आता है.
ग्राहकों की सबसे बड़ी परेशानी, डिलीवरी गायब और संवाद बंद
उपभोक्ताओं द्वारा दर्ज की गई शिकायतों में सबसे बड़ी श्रेणी सामान की गैर-डिलीवरी (Non-delivery) से जुड़ी थी, जिसके 79,818 से अधिक मामले सामने आए. जब ग्राहक का पेमेंट कट जाता है और सामान समय पर नहीं पहुँचता, तो असली समस्या शुरू होती है. ई-कॉमर्स कंपनियों का सिस्टम सीधे इंसान (Human Agent) से बात कराने के बजाय ग्राहकों को एआई चैटबॉट में घुमाता रहता है.
अन्य मुख्य शिकायतों में शामिल हैं:
- गलत या खराब उत्पाद भेजना: ऑर्डर कुछ और किया गया और पार्सल में कुछ और या टूटा हुआ सामान निकला.
- रिफंड और रिप्लेसमेंट से इनकार: कंपनी की तय नीतियों के बावजूद रिफंड देने में हफ्तों का समय लगाना या सीधे मना कर देना.
- अनधिकृत कटौती: उपभोक्ता की अनुमति के बिना खाते से पैसे कटना और नकली (Fake) सामान की डिलीवरी.
- सेवाओं में कमी: क्विक-कॉमर्स ऐप्स द्वारा तय मिनटों में डिलीवरी का दावा करके घंटे भर लटकाए रखना.
सरकार और अथॉरिटी का कड़ा एक्शन
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की इस मनमानी और ग्राहकों को गुमराह करने वाले रवैये पर केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने कड़ा रुख अपनाया है. सरकार द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक:
- लाखों का जुर्माना: सीसीपीए ने नियम उल्लंघन करने वाले 47 ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर लगभग 1,12,01,500 रुपये का जुर्माना लगाया है.
- करोड़ों रुपये का रिफंड: प्री-लिटिगेशन (अदालत जाने से पहले) स्तर पर ही 1.47 लाख से अधिक शिकायतों का निपटारा किया गया. इसके तहत उपभोक्ताओं को 91 करोड़ रुपये से अधिक का रिफंड दिलवाया गया, जिसमें अकेले 63 करोड़ रुपये से अधिक का हिस्सा ई-कॉमर्स कंपनियों से जुड़ा था.
- क्विक-कॉमर्स पर नकेल: 10-15 मिनट में डिलीवरी का दावा करने वाले क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से जुड़ी 5.11 लाख से अधिक शिकायतों का साल 2025 में निपटारा किया गया.
आगे का रास्ता, उपभोक्ताओं के लिए जरूरी कदम
ऑनलाइन खरीदारी करते समय अगर कोई कंपनी आपको घटिया सामान देती है, रिफंड अटकाती है या कस्टमर सपोर्ट से सीधा संपर्क नहीं होने देती, तो घबराने की जरूरत नहीं है.
हेल्पलाइन का उपयोग करें: अपनी शिकायत तुरंत नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (1915) पर दर्ज कराएं या उनके NCH ऐप/पोर्टल का उपयोग करें.
- सबूत सुरक्षित रखें: बिल, पार्सल अनबॉक्सिंग का वीडियो, और कस्टमर चैट के स्क्रीनशॉट हमेशा संभाल कर रखें.
- कंज्यूमर फोरम जाएं: यदि कंपनी NCH के हस्तक्षेप के बाद भी समाधान नहीं करती है, तो आप Consumer Value App या e-Daakhil पोर्टल के माध्यम से कंज्यूमर कोर्ट में ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं.
डिजिटल दौर में ग्राहकों की सुविधा के नाम पर सीधे संवाद से भागना कंपनियों को भारी पड़ सकता है. सरकार की सख्त कार्रवाई यह साफ संकेत देती है कि ई-कॉमर्स कंपनियों को अपनी कस्टमर सर्विस और रिफंड नीतियों में पारदर्शिता लानी ही होगी.



