नई दिल्ली. देशभर में नीट-यूजी पेपर लीक और इसके खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना त्यागपत्र भेजते हुए स्पष्ट किया है कि पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम से उनका मन अत्यंत व्यथित और दुखी है.
इस्तीफे की मुख्य वजह और त्यागपत्र के खास अंश
अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पत्र साझा किया. उन्होंने पत्र में लिखा कि वह पिछले 4 दशकों से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहे हैं. उन्होंने देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करने की बात कही.
प्रधान को अपने पत्र में लिखा
“पिछले 10 दिनों का घटनाक्रम देखकर मेरा मन दुःखी है. यह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है. भारत की युवाशक्ति ही इस देश की असली ताकत है. देश की युवाशक्ति को भ्रम के कुचक्र में फंसने नहीं देंगे, यही मेरा संकल्प है.”
उन्होंने आगे कहा कि वह नहीं चाहते कि राष्ट्र विरोधी ताकतें मौजूदा स्थिति का फायदा उठाएं या देश के किसी भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में उलझे. बच्चे अपना पूरा समय पढ़ाई और करियर बनाने पर फोकस करें, इसी बात पर विचार करते हुए उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री को सौंप दिया है.
नीट-यूजी परीक्षा और विवाद का घटनाक्रम
3 मई को आयोजित हुई NEET-UG 2026 की परीक्षा में अनियमितताएं सामने आने के बाद भारी हंगामा हुआ था. सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी, परीक्षा रद्द की और री-एग्जाम की घोषणा की थी. इसके साथ ही अगले वर्ष से इस परीक्षा को कंप्यूटर-आधारित टेस्ट (CBT) मोड में कराने का निर्णय लिया गया.
हालांकि, 21 जून को परीक्षा पूरी होने और 16 जुलाई को परिणाम घोषित होने के बाद भी दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों और विभिन्न संगठनों द्वारा लगातार विरोध प्रदर्शन जारी रहे. विपक्ष और छात्र संगठनों के तीखे विरोध के बीच शिक्षा मंत्री का यह इस्तीफा मौजूदा राजनीतिक और शैक्षणिक परिदृश्य में एक बहुत बड़ा मोड़ माना जा रहा है. प्रधान ने अपने पत्र के अंत में प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी देश और ओडिशा के युवाओं की सेवा करते रहने का संकल्प लिया है.
शिक्षा मंत्री का इस्तीफा सही, मरने वालों के परिजनों को मिले एक-एक करोड़
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के खेमे में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है. दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इसे आंदोलन की पहली बड़ी सफलता करार दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का यह फैसला जनता और छात्रों की एकजुटता का परिणाम है, लेकिन जब तक उनकी बाकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका धरना-प्रदर्शन यूं ही जारी रहेगा.
CJP की प्रमुख मांगें और रुख
अभिजीत दीपके ने मीडिया और प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि संगठन अपनी मांगों को लेकर पूरी तरह अडिग है. CJP ने सरकार के सामने दो मुख्य मांगें रखी हैं:
- मुआवजा: नीट पेपर लीक और इस पूरे विवाद से जुड़े तनाव के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए.
- पुलिस कार्रवाई और एफआईआर वापसी: 20 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और छात्रों पर दर्ज किए गए मुकदमे वापस लिए जाएं.
संगठन के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने सरकार के साथ किसी भी संभावित बातचीत पर बोलते हुए कहा कि CJP बातचीत के लिए पूरी तरह तैयार है. सरकार जब भी उन्हें चर्चा के लिए बुलाएगी, उनका प्रतिनिधिमंडल उसमें शामिल होगा. हालांकि, जब तक छात्रों के हितों से जुड़ी ये सभी मांगें जमीन पर नहीं उतरतीं, तब तक जंतर-मंतर से यह आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा.
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