नई दिल्ली. संसद की लोक लेखा समिति (PAC) ने रक्षा मंत्रालय के काम-काज, सप्लाई चेन मैनेजमेंट और सैन्य उपकरणों की खरीद प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं. समिति ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में बताया कि सेना को ख़राब गुणवत्ता का गोला-बारूद सप्लाई किए जाने के कारण सरकार को 62.10 करोड़ रुपये का बड़ा वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा है. इसके साथ ही, स्वदेशी ‘धनुष’ तोप परियोजना में हो रही देरी को लेकर भी मंत्रालय को कड़ा संदेश दिया गया है.
1. घटिया गोला-बारूद से 62.10 करोड़ की चपत
लोक लेखा समिति की 49वीं रिपोर्ट के अनुसार, ऑर्डनेंस फैक्ट्री बड़माल की ओर से भारतीय सेना को जो गोला-बारूद सप्लाई किया गया था, वह गुणवत्ता के मानकों पर खरा नहीं उतरा.
- ऑपरेशनल तैयारी प्रभावित: समिति ने स्पष्ट किया कि ख़राब गोला-बारूद को बदलने की प्रक्रिया में केवल 62.10 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान ही नहीं हुआ, बल्कि इससे देश की सुरक्षा और सेना की सामरिक (Operational) तैयारियों पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है.
- सख्त SOP लागू करने के निर्देश: PAC ने रक्षा मंत्रालय से सिफारिश की है कि सप्लाई चेन में तत्काल प्रभाव से कड़े मानक संचालन प्रक्रिया (SOPs), सख्त क्वालिटी कंट्रोल और समयबद्ध मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित किए जाएं.
2. आर्टिलरी गन्स की खरीद में 20 साल की देरी
रिपोर्ट में देश की आर्टिलरी प्रणाली के आधुनिकीकरण में हुई अत्यधिक देरी पर चिंता जताई गई है:
- बोफोर्स के बाद ठहराव: 1986 में 155mm/39 कैलिबर की बोफोर्स तोपों की खरीद और तकनीक हस्तांतरण (Technology Transfer) के बाद से लंबे समय तक नई तोपों की खरीद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी.
- पुरानी तोपों पर निर्भरता: नई तोप प्रणालियों को सेना में शामिल करने में लगभग दो दशक का समय लग गया, जिसके कारण सेना को लंबे समय तक पुरानी प्रणालियों पर निर्भर रहना पड़ा.
3. स्वदेशी ‘धनुष’ तोप प्रोजेक्ट की चुनौतियां
आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत विकसित की जा रही स्वदेशी 155mm/45 कैलिबर ‘धनुष’ तोप को समिति ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि तो माना, लेकिन इसके उत्पादन में हो रही देरी पर नाराजगी जताई:
- इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी: रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि इतने उन्नत स्तर की तोप निर्माण के लिए देश में शुरुआती स्तर पर पर्याप्त विशेषज्ञता और बुनियादी ढांचा उपलब्ध नहीं था.
- पूर्वाकलन जरूरी: पीएसी ने सुझाव दिया है कि भविष्य में किसी भी बड़े रक्षा प्रोजेक्ट को हरी झंडी देने से पहले घरेलू विनिर्माण क्षमता और इंफ्रास्ट्रक्चर का सही आकलन किया जाना चाहिए.
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