खबर के मुख्य बिंदु (Highlights)
- बड़ा वित्तीय समझौता: वेदांता रिसोर्सेज (VRL) ने जुटाए 2.25 बिलियन डॉलर (करीब ₹21,000 करोड़).
- शेयरों पर विशेष पाबंदी: वेदांता एल्युमीनियम (VAML) के 56.38% शेयरों पर ‘इनकम्ब्रेन्स’ (Encumbrance) लागू.
- कंपनी की सफाई: यह शेयरों को गिरवी (Pledge) रखना नहीं, बल्कि SEBI के नियमों के तहत की गई व्यवस्था है.
- वैश्विक बैंकों का भरोसा: बार्कलेज, सिटीबैंक और जे.पी. मॉर्गन जैसे दिग्गज अंतरराष्ट्रीय बैंक डील में शामिल.
नई दिल्ली . माइनिंग और मेटल सेक्टर के दिग्गज अरबपति अनिल अग्रवाल की अगुवाई वाले वेदांता ग्रुप ने अपनी वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए एक बड़ा दांव खेला है. वेदांता रिसोर्सेज लिमिटेड (VRL) ने अंतरराष्ट्रीय बाजार से लगभग ₹21,000 करोड़ ($2.25 बिलियन) का भारी-भरकम फंड जुटाने की प्रक्रिया पूरी कर ली है. इस बड़े वित्तीय समझौते के तहत ग्रुप ने वेदांता एल्युमीनियम के शेयरों पर कुछ नई प्रतिबंधात्मक शर्तें (Encumbrance) स्वीकार की हैं.
क्या शेयर गिरवी रखे गए हैं? जानें SEBI का नियम
बाजार में भ्रम की स्थिति को दूर करते हुए वेदांता ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग (BSE/NSE) में स्थिति साफ की है. कंपनी के मुताबिक, यह शेयरों को गिरवी रखना (Pledge) नहीं है, बल्कि भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के नियमों के तहत एक विशेष वित्तीय व्यवस्था है.
समझौते की शर्तों के अनुसार, प्रमोटर ग्रुप को वेदांता एल्युमीनियम मेटल लिमिटेड (VAML) में कम से कम 50.1% की बहुलांश हिस्सेदारी और नियंत्रण बनाए रखना अनिवार्य होगा. इस सौदे के तहत प्रमोटर ग्रुप की कुल 56.38% हिस्सेदारी (लगभग 220.47 करोड़ शेयर) इनकम्ब्रेन्स के दायरे में आई है.
कहां खर्च होगा यह ₹21,000 करोड़ का फंड?
कंपनी इस जुटाई गई भारी राशि का इस्तेमाल मुख्य रूप से तीन बड़े उद्देश्यों के लिए करेगी:
- पुराने कर्ज का भुगतान: ग्रुप के मौजूदा वित्तीय कर्ज (Financial Indebtedness) और उस पर लगने वाले भारी ब्याज को समय पर चुकाने के लिए.
- बिजनेस विस्तार: कंपनी की सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों और भावी योजनाओं को गति देने के लिए.
- लेन-देन खर्च: डील से जुड़े जरूरी शुल्कों और खर्चों का निपटारा करने के लिए.
ग्लोबल बैंकों ने जताया अनिल अग्रवाल पर भरोसा
वेदांता के इस मेगा री-फाइनेंसिंग सौदे में दुनिया के शीर्ष वित्तीय संस्थानों ने हिस्सा लिया है. इनमें बार्कलेज बैंक (Barclays), सिटीबैंक (Citibank), जे.पी. मॉर्गन (J.P. Morgan), स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक और फर्स्ट अबू धाबी बैंक जैसे बड़े नाम शामिल हैं.
अनिल अग्रवाल की यह रणनीति वेदांता ग्रुप की बैलेंस शीट को मजबूत करने और महंगे कर्जों को कम करने की दिशा में मास्टरस्ट्रोक मानी जा रही है. इससे कंपनी की तरलता (Liquidity) बढ़ेगी और वेदांता एल्युमीनियम के संचालन में और तेजी आएगी.
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