- विजिलेंस के छापों के बावजूद संवेदनशील पदों पर ‘पिक एंड चूज’, 28 साल की सेवा में 26 साल एक ही स्टेशन पर जमने का रिकॉर्ड
- आदित्य चौधरी ने अमित चौधरी को पार्सल से हटाया तो गुड्स शेड का सर्वोपरि प्रभारी बनाया, निर्णय पर उठाये जा रहे सवाल
- टाटानगर में पार्सल की ओवरलोडिंग और हमसफर एक्सप्रेस अनसेफ पार्सल अनलोडिंग पर भी अफसरों की रहस्यमयी चुप्पी
चक्रधरपुर/टाटानगर. दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) का चक्रधरपुर (CKP) रेल मंडल एक बार फिर ट्रांसफर-पोस्टिंग में प्रशासनिक विसंगतियों, नियमों की धज्जियां उड़ाने और मनमानी को लेकर सुर्खियों में है. रेलवे बोर्ड और जोनल विजिलेंस के भ्रष्टाचार-विरोधी दावों और सख्त रोटेशन पॉलिसी के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, चक्रधरपुर मंडल के कमर्शियल विभाग में नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है.
सीनियर डीसीएम (Sr. DCM) आदित्य चौधरी की कार्यशैली पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. विभाग में ‘शुचिता’ और ‘पारदर्शिता’ का ढोल पीटने वाले प्रशासन की नाक के नीचे चहेते कर्मचारियों को लगातार ‘कमाऊ और संवेदनशील’ सीटों पर बनाए रखने का ‘खेल’ बदस्तूर जारी है.
वहीं अब इस मामले में दक्षिण पूर्व रेलवे के विजिलेंस विभाग और इसके प्रमुख एसडीजीएम (SDGM) की खामोशी पर भी उंगलियां उठने लगी हैं. सवाल यह उठ रहा है कि क्या जोनल विजिलेंस को इस ‘ट्रांसफर उद्योग’ और चहेतों को लगातार ‘कमाऊ व संवेदनशील’ सीटों पर बनाए रखने के खेल की भनक नहीं है, या फिर जान-बूझकर आंखें मूंद ली गई हैं?
स्टेशन बदलने के बजाय सिर्फ ‘कुर्सी’ बदलने का खेल, 28 में से 26 साल टाटानगर में !
रेलवे के आधिकारिक कार्यालय आदेशों और फाइलों का विश्लेषण करें तो चक्रधरपुर रेल मंडल में ट्रांसफर पॉलिसी महज एक कागजी औपचारिकता बनकर रह गई है. नियम कहते हैं कि संवेदनशील पदों पर लंबे समय से जमे कर्मचारियों का रोटेशन अनिवार्य रूप से गैर-संवेदनशील पदों या अन्य स्टेशनों पर किया जाए. लेकिन यहां स्टेशन बदलने के बजाय सिर्फ पटल (Desk) और कुर्सी बदली जा रही है.
ताजा मामला टाटानगर के मुख्य पार्सल पर्यवेक्षक (CPS) अमित कुमार चौधरी (कमर्शियल सुपरिंटेंडेंट, लेवल-8) का है. रेलवे रिकॉर्ड्स के मुताबिक:
अमित चौधरी अपनी 28 वर्षों की कुल सेवा में से लगभग 26 साल अकेले टाटानगर में ही पदस्थापित रहे हैं.
इससे पूर्व वे टाटानगर गुड्स शेड में लगातार 8 से 10 वर्षों तक जमे रहे थे, जहां गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोपों के बाद उन्हें हटाया गया था.
महज कुछ समय बाद उन्हें पुनः टाटानगर में मुख्य पार्सल पर्यवेक्षक (CPS) बना दिया गया.
हाल ही में पार्सल विभाग में अनियंत्रित कार्यशैली और गड़बड़ियों के बाद जब उन्हें CPS पद से हटाया गया, तो रेलवे प्रशासन ने उन्हें किसी गैर-संवेदनशील पद या टाटानगर से बाहर भेजने के बजाय पुनः टाटानगर गुड्स शेड (CS/PSTA/TATA) का सर्वोपरि प्रभारी (In-charge) बना दिया.
कार्रवाई के नाम पर पार्सल से हटाकर गुड्स शेड की प्राइम पोस्टिंग सौंपना सीनियर डीसीएम की तथाकथित मेहरबानी और कार्यशैली पर सीधे सवाल खड़े करता है.
90 दिनों में ‘मर्सी Appeal’ का खेल और चुनिंदा स्टेशनों पर स्थायी कब्जा
चक्रधरपुर रेल मंडल में सिर्फ टाटानगर ही नहीं, बल्कि राउरकेला, चक्रधरपुर और झारसुगुड़ा के पार्सल व गुड्स विभागों का भी यही हाल है. सूत्रों और आधिकारिक पत्राचार से खुलासा हुआ है कि
90 दिनों का जादू : विजिलेंस या प्रशासनिक समीक्षा में अनियमितताओं के दोषी पाए गए कर्मचारियों को औपचारिकता के लिए हटाया जाता है. लेकिन महज 90 दिनों (3 महीने) के भीतर मर्सी अपील (Mercy Appeal) या विशेषाधिकार का इस्तेमाल कर उन्हें दोबारा उन्हीं संवेदनशील प्राइम पोस्टिंग्स पर बहाल कर दिया जाता है.
सिंडिकेट का कब्जा : क्या वजह है कि चक्रधरपुर मंडल के पूरे पार्सल और गुड्स शेड में सालों-साल घूम-फिरकर सिर्फ गिने-चुने चेहरे ही पदस्थापित होते हैं?
ओवरलोडिंग और हमसफर एक्सप्रेस अनसेफ पार्सल मामला कार्रवाई के नाम पर सन्नाटा
हाल ही में टाटानगर पार्सल में मीडिया द्वारा पार्सल ओवरलोडिंग का मामला उजागर किया गया था. इसके अलावा, हमसफर एक्सप्रेस में अनसेफ पार्सल अनलोडिंग की गंभीर घटना में भी दो रेलकर्मियों दिलीप सिंह और गोस्वामी के नाम सीधे तौर पर सामने आए थे, जिससे ट्रेन सुरक्षा और रेलवे राजस्व दोनों को खतरा पैदा हुआ था.
हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर घटना पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई या विजिलेंस जांच तो दूर, सीनियर डीसीएम कार्यालय ने संबंधित दोषी कर्मचारियों को एक कारण बताओ नोटिस या चेतावनी तक जारी नहीं की. यह रहस्यमयी चुप्पी साबित करती है कि मंडल में प्रशासनिक सरपरस्ती किस कदर हावी है.
रेलवे प्रशासन और विजिलेंस से सवाल !
रोटेशन नीति का उल्लंघन क्यों? जब रेलवे बोर्ड के स्पष्ट निर्देश हैं कि संवेदनशील पदों पर पदस्थापित कर्मचारियों का नियमित तबादला अन्य स्टेशनों पर हो, तो अमित चौधरी जैसे कर्मचारियों को 28 में से 26 साल टाटानगर में ही क्यों रखा गया?
अनियमितता के बाद ‘प्राइम’ तोहफा क्यों? जिस कर्मचारी को गुड्स शेड में 10 साल रहने के दौरान अनियमितता के आरोपों पर हटाया गया था, उसे पार्सल में शिकायतों के बाद दोबारा उसी गुड्स शेड का चीफ (CGS) किस आधार पर बनाया गया?
90 दिनों की ‘मर्सी’ का क्या है गणित? विजिलेंस जांच या प्रशासनिक कार्रवाई के बाद हटाए गए रेलकर्मियों को महज 90 दिनों के भीतर मर्सी अपील के तहत दोबारा मलाईदार सीटों पर पोस्टिंग देने का आधार क्या है?
सुरक्षा से खिलवाड़ पर चुप्पी क्यों? हमसफर एक्सप्रेस अनसेफ पार्सल अनलोडिंग मामले में नामज़द रेलकर्मियों के खिलाफ Sr. DCM कार्यालय ने चेतावनी तक जारी क्यों नहीं की?
जोनल विजिलेंस की खामोशी का राज? गार्डन रीच (दक्षिण पूर्व रेलवे मुख्यालय) का विजिलेंस विभाग चक्रधरपुर रेल मंडल के कमर्शियल विभाग में चल रहे इस ‘पिक एंड चूज’ और ट्रांसफर खेल पर आंखें मूंदकर क्यों बैठा है? क्रमश :
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