- NCERT की राष्ट्रीय संगोष्ठी में झारखंड का एकमात्र प्रतिनिधित्व; शिक्षक मनोज कुमार सिंह ने पेश किया ‘जॉयफुल लर्निंग’ का अनोखा मॉडल
जमशेदपुर. आज के आधुनिक दौर में जहां स्कूली बच्चों पर बस्ते का बोझ और परीक्षाओं का तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, वहीं झारखंड के जमशेदपुर से शिक्षा जगत को जागरूक और प्रेरित करने वाली एक बेहद शानदार खबर सामने आई है.
नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की राष्ट्रीय संगोष्ठी में झारखंड के एकमात्र शिक्षक मनोज कुमार सिंह ने यह साबित कर दिया है कि अगर सही और नवाचारी (Innovative) तरीका अपनाया जाए, तो पढ़ाई बच्चों के लिए बोझ नहीं बल्कि एक उत्सव बन सकती है.
उनके इस प्रयास को राष्ट्रीय स्तर पर न सिर्फ सराहा गया है, बल्कि पुरस्कृत भी किया गया है. मनोज कुमार जमशेदपुर के बागबेड़ा कॉलोनी के रहने वाले हैं.
तनावमुक्त शिक्षा समय की मांग: क्या है ‘जॉयफुल पेडागोगी’?
नई दिल्ली के शिक्षक शिक्षा विभाग द्वारा 29–30 जून 2026 को “प्रोमोटिंग इनोवेटिव प्रैक्टिशेस एंड एक्सपेरिमेंटस इन एजुकेशन फोर स्कूल्स एंड टीचर एजुकेशन” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया था.
इसमें जमशेदपुर के सुंदरनगर स्थित पी.एम. श्री उच्च विद्यालय, खुखड़ाडीह के सहायक शिक्षक मनोज कुमार सिंह ने अपने विशेष प्रोजेक्ट “एजुकेशन थ्रू जॉय एंड हैप्पीनेस: जॉयफुल एंड सस्टेनेबल पेडागोगी” (खुशियों और आनंद के जरिए शिक्षा) का सफलतापूर्वक प्रस्तुतीकरण किया.
तकनीकी सत्र के दौरान श्री सिंह ने पावरप्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से देश भर से आए विशेषज्ञों को बताया कि पारंपरिक रट्टा मार प्रणाली को बदलकर कैसे खेल, स्थानीय संसाधनों, कला, कहानियों और गणितीय गतिविधियों के जरिए शिक्षण को अधिक प्रभावी और स्थायी बनाया जा सकता है.
जब बच्चे खुद गतिविधियों में शामिल होते हैं, तो उनका मानसिक विकास तेजी से होता है और वे स्कूल आने से डरते नहीं, बल्कि चाव से आते हैं.
पूरे राज्य के लिए गर्व का क्षण
इस राष्ट्रीय संगोष्ठी की सबसे खास बात यह रही कि देश भर के विभिन्न राज्यों से महज 31 सर्वश्रेष्ठ नवाचारी शिक्षकों और शिक्षक-शिक्षा संस्थानों का चयन किया गया था. इन 31 चयनित दिग्गजों में पूरे झारखंड राज्य से केवल मनोज कुमार सिंह का चयन हुआ, जो न सिर्फ जमशेदपुर बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक गौरव का विषय है. इस गौरवमयी उपलब्धि के लिए उन्हें मंच पर नकद राशि और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया गया.
टीम वर्क और समर्पण की जीत
अपनी इस ऐतिहासिक सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए शिक्षक मनोज कुमार सिंह ने कहा:
“यह उपलब्धि केवल मेरी व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि यह झारखंड के उन सभी शिक्षकों की नवाचारी सोच और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति समर्पण का सम्मान है जो हर दिन सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने में जुटे हैं. इस राष्ट्रीय मंच से जो अनुभव और सुझाव मुझे मिले हैं, उन्हें मैं अपने राज्य के बच्चों के भविष्य को और बेहतर बनाने में लगाऊंगा.”
उन्होंने इस कार्ययोजना को पूरा करने में विद्यालय के प्रधानाध्यापक अरुण कुमार और अपने साथी शिक्षकों के विशेष योगदान की सराहना की. वहीं दूसरी ओर, शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस सफलता पर हर्ष जताया है और इसे राज्य के अन्य शिक्षकों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बताया है.
यह खबर इस बात की गवाही देती है कि अगर शिक्षक ठान लें, तो सरकारी स्कूलों के बच्चे भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मेधा का परचम लहरा सकते हैं.
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