जमशेदपुर. टाटा स्टील और टाटा वर्कर्स यूनियन के बीच 24 जून को संपन्न हुआ ग्रेड समझौता अब विवादों के घेरे में है. यूनियन के पूर्व उपाध्यक्ष आर सी झा ने वर्तमान नेतृत्व की कार्यशैली पर तीखा हमला बोलते हुए इस समझौते को कर्मचारियों के साथ छलावा करार दिया है। इस बयान के बाद टाटा वर्कर्स यूनियन के भीतर का राजनीतिक पारा अचानक गर्म हो गया है.
आर सी झा ने सीधे शब्दों में आरोप लगाया कि वार्ता के टेबल पर बैठे पदाधिकारियों का ध्यान कर्मचारियों के आर्थिक हितों पर था ही नहीं. उन्होंने दावा किया, “यूनियन नेतृत्व के बीच आपसी तालमेल और भरोसे की भारी कमी थी. बेहतर सौदेबाजी (Bargaining) करने के बजाय कई बड़े पदाधिकारी व्यक्तिगत राजनीति और अपना कार्यकाल बढ़ाने के जोड़-तोड़ में व्यस्त रहे.”
एनएस (NS) कर्मियों को मिला सिर्फ धोखा
पूर्व उपाध्यक्ष ने कहा कि इस समझौते से आम कर्मचारियों, खासकर नॉन-स्टैंडर्ड (NS) ग्रेड के साथियों में भारी निराशा है. उन्हें जो उम्मीदें थीं, उसके मुताबिक अपेक्षित लाभ नहीं मिला. नेतृत्व ने अपनी कुर्सी बचाने के चक्कर में प्रबंधन के सामने कर्मचारियों का पक्ष मजबूती से रखा ही नहीं.
गौरतलब है कि आर सी झा के इन गंभीर आरोपों पर वर्तमान यूनियन नेतृत्व की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन इस बगावती सुर ने टाटा स्टील के कर्मचारियों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है.
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