- रोमानिया के क्रायोवा में आयोजित अंतरराष्ट्रीय शेक्सपियर महोत्सव 2026 में शामिल होने गया था देश के 20 विद्यार्थियों का दल
- KA171 स्टूडेंट मोबिलिटी प्रोग्राम के अंतर्गत 1 अप्रैल से 31 मई 2026 तक रोमानिया में दल ने अकादमिक एवं सांस्कृतिक इंटर्नशिप में भाग लिया
- देश से बाहर अंतरराष्ट्रीय मंच पर शिक्षा, सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की दिशा में बढ़ाया गया बड़ा कदम शामिल होगा यह मंच
नई दिल्ली / जमशेदपुर. अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की जनजातीय संस्कृति का परचम लहराकर KIIT (कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी) के 10 और KISS (कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज) के 10 छात्र आज स्वदेश लौट आए हैं. रोमानिया के क्रायोवा में आयोजित अंतरराष्ट्रीय शेक्सपियर महोत्सव 2026 में इतिहास रचने के बाद दिल्ली आगमन पर इन छात्रों का भव्य स्वागत किया गया. छात्रों के इस दल में झारखंड से एकमात्र लौहनगरी जमशेदपुर की बेटी संजना सिंह भी शामिल रही. आदित्या सिंडिकेट कॉलोनी, आदित्यपुर निवासी संजना के पिता उपेंद्र कुमार सिंह उद्योगपति है जबकि माता शोभा सिंह जर्नलिस्ट हैं. संजना KIIT में फोर्थ इयर की छात्रा हैं.
2 महीने का रहा रोमानिया दौरा
यह टीम KA171 स्टूडेंट मोबिलिटी प्रोग्राम के अंतर्गत 1 अप्रैल से 31 मई 2026 तक (लगभग दो माह) रोमानिया में रही. इस दौरान उन्होंने न केवल अकादमिक एवं सांस्कृतिक इंटर्नशिप में भाग लिया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय शिक्षा, सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा दिया.

संताली भाषा में गूंजे शेक्सपियर के नाटक
इस अंतरराष्ट्रीय अनुभव की सबसे खास बात यह रही कि छात्रों ने विलियम शेक्सपियर के विश्व प्रसिद्ध नाटकों का मंचन अपनी जनजातीय भाषा में किया. इसमें रोमियो एंड जूलियट, हैमलेट, मैकबेथ आदि की प्रस्तुति ,खास रही. वैश्विक मंच पर संताली भाषा में हुए इस अनूठे नाट्य मंचन ने दुनिया भर के विचारकों और दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और खूब प्रशंसा बटोरी.
ओल चिकी लिपि के 100वें वर्ष में ऐतिहासिक उपलब्धि
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की जनजातीय संस्कृति के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि संताली भाषा की ओल चिकी लिपि अपने 100वें वर्ष (शताब्दी वर्ष) में प्रवेश कर चुकी है. इस ऐतिहासिक मोड़ पर पहली बार शेक्सपियर के नाटकों के माध्यम से इस जनजातीय भाषा को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया गया.
पहली बार विदेशी मंच पर संताली नृत्य
KISS के छात्रों के लिए यह दौरा बेहद अलग था. इससे पहले ये छात्र मुख्य रूप से खेल प्रतियोगिताओं के लिए विदेश जाते रहे थे, लेकिन यह पहला मौका था जब उन्होंने किसी यूरोपीय देश में जाकर अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति और संताली नृत्य का प्रदर्शन किया. इस महोत्सव में 30 देशों के 150 से अधिक छात्रों और विश्वभर के 71 विश्वविद्यालयों के 3,000 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिली टीम, जानी सांस्कृतिक विरासत की अहमियत

नई दिल्ली लौटने के बाद टीम में शामिल सदस्यों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से शिष्टाचार मुलाकात की और उन्हें अंतरराष्ट्रीय शेक्सपियर महोत्सव 2026 में संताली भाषा में शेक्सपियर नाटकों से देश की संस्कृति की पहचान स्थापित करने की जानकारी दी. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसे ऐतिहासिक पल करार देते हुए वैश्विक मंच पर प्रतिभा प्रदर्शन को शानदार अवसर बताया.
दिल्ली में रोमानियाई दूतावास ने आयोजित किया विशेष कार्यक्रम
देश लौटने के बाद नई दिल्ली स्थित रोमानियाई दूतावास के सहयोग से एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम में छात्रों ने विभिन्न देशों के राजदूतों, उच्चायुक्तों और दिल्ली की विशिष्ट हस्तियों के सामने संताली भाषा में अपने शेक्सपियर नाटकों की प्रस्तुति दी. यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय अकादमिक गतिशीलता और सांस्कृतिक कूटनीति की मिसाल बना.
संस्थापक ने दी बधाई
KIIT और KISS के संस्थापक अच्युत सामंत (Achyuta Samanta) ने सभी छात्रों को इस अभूतपूर्व सफलता पर बधाई दी. उन्होंने कहा कि छात्रों की यह उपलब्धि KIIT, KISS, ओडिशा और पूरे देश के लिए गौरव का विषय है.
संजना ने कहा – अनोखा और यादगार पल
स्वदेश लौटने पर जमशेदपुर की बेटी संजना सिंह ने अपने दौरे और राष्ट्रपति से हुई मुलाकात के अनुभव को मीडिया से साझा किया.
उन्होंने बताया कि यह बेहद अनोखा और जीवन का सबसे यादगार पल था. उनके लिए यह गर्व की बात है कि वैश्विक मंच पर अपनी जड़ों और जनजातीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला. उन्होंने इसके लिए अपने पिता-मां और भाई के योगदान को याद किया जिनसे उन्हें हर पल मार्गदर्शन और समर्थन मिला.

