दानापुर : जिस तरह पूरे भारतीय रेल में पूर्व मध्य रेल अपने कार्यकलापों और कलाबाजियों के लिए बदनाम है उसी तरह पूर्व मध्य रेल में दानापुर मंडल अपने चालबाज़ी और धूर्त्तता के लिए कुख्यात है. इस मंडल में टेंडर का खेल निराला है.
सैकड़ों करोड़ के बाउंड्री वॉल फेंसिंग जो भी कह लीजिए उसके टेंडर फाइनल हो जाते हैं ऐसे बाउंड्री वॉल के लिए जिसका बाउंड्री अभी तक फिक्स नहीं है. झाझा से प॰ दीन दयाल उपाध्याय तक थर्ड फोर्थ लाइन का अलाइनमेंट अभी क्लियर नहीं हो पाया है कई जगह भूमि अधिग्रहण का कार्य होना है.
महाप्रबंधक के मौखिक और लिखित आदेश में मना करने के बाद भी दानापुर मंडल में जो फूर्ती टेंडर को फाइनल करने में दिखाई काश वैसी तत्परता कर्मचारियों और यात्रियों के समस्याओं के समाधान के लिए दिखायी होती तो आज भारतीय रेल धन्य हो जाता . एक मामले में जहां टेंडर नहीं करना था वहां माल पानी और कमीशन के चक्कर में रातों रात टेंडर निपटाए गए और मोटा कमीशन हर स्तर पर लिया गया.
दूसरे मामले में एक टेंडर जो सीधे यात्री सुविधा से जुड़ा हुआ है और सीआरबी के निर्देश पर बिहार के महापर्व छठ पूजा के पहले हो जाना चाहिए , लेकिन मनपसंद पार्टी का पेपर सही नहीं होने के बावजूद पहले तो उसको वैध करने का कुत्सित प्रयास किया गया, जब नापाक इरादे सफल नहीं हुए तो फ़र्ज़ी कंप्लेन कराकर उस टेंडर को डिस्चार्ज करने का गन्दा खेल खेला जा रहा है. जो भी कंप्लेनेंट है वो ग़लत कंप्लेन करके पूरी टेंडर प्रक्रिया को डिरेल करने में लगे हैं ताकि यात्री सुविधा का बहुत बड़ा काम समय पर ना हो सके और यात्री परेशान हो सके या फिर भीड़ के कारण हादसे हो सके और लोगों की जान जा सके.
कुछेक अधिकारियों का व्यक्तिगत स्वार्थ और मोटा कमीशन का लालच बहुत बड़े दुर्घटना को दावत दे रहा है . निविदा प्रक्रिया में सब कुछ नियमानुसार और सही होने के बावजूद भी एकाध अधिकारी निविदा में भाग लेने वाले असफल हो रहे फर्म्स के साथ मिलकर एक बड़ी साजिश को अंजाम दे रहे हैं . टेंडर खुलने के 10 दिन बाद एक ऐसे मनगढ़ंत मुद्दे को उठाया जा रहा है जिसका कोई आधार नहीं है . जिस मुद्दे को उठाया जा रहा है उसका कोई मतलब नहीं है ये सभी फर्म्स को उसी आधार पर रेलवे में कई काम मिले हुए हैं और वो नियम के अनुसार है.
जितनी फर्म्स ने इस मुद्दे को टेंडर के 10 दिन बाद उठाया है इससे साफ़ पता चलता हैं की वो साज़िश का हिस्सा है इस तथ्य का पता इस बात से भी चल सकता है झूठी शिकायत करने वाली सभी फ़र्म्स इस निविदा में तकनीकी रूप से असफल फर्म की सहयोगी कंपनियां हैं या रही हैं . ये टेंडर प्रकिया को प्रभावित करने का प्रयास है जो कि नियम के विरुद्ध है . रेलवे के नियमों के अनुसार उस फर्म पर ब्लैकलिस्टिंग की कार्यवाही होनी चाहिए .
यह पता चला है कि एक फर्म जो इस निविदा में तकनीकी मानकों पर सफल नहीं होने के कारण एक दो अधिकारियों के साथ मिल कर साजिश रच रही है और बिहार में छठ जैसे महापर्व के दौरान किए जा रहे यात्री हित के कार्य को रोकने का प्रयास कर रही है. जिसको बिहार की संस्कृति का ज्ञान नहीं होगा वही इस तरह के पाप का भागी बनेगा .
टेंडर का खेल यात्रियों की जान पर कहीं भारी ना पड़ जाए . टेंडर प्रक्रिया नियम के अनुसार होना चाहिए ना कि किसी के पसंद नापसंद से . टेंडर प्रक्रिया में बाधा पहुँचाने वाली ग़लत आधार पर गुमराह करने वाली कंपनियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए ताकि वो भविष्य में कोई साज़िश ना कर पाए .

