सबरीमाला मंदिर के लिए रविवार को एक बेहद पवित्र, पारंपरिक और आध्यात्मिक प्रक्रिया के तहत नए मुख्य पुजारियों का चयन किया गया। यह चयन केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि उस अलौकिक आस्था और विश्वास का जीवंत प्रतीक है1
तिरुवनंतपुरम. केरल की शांत वादियों और घने जंगलों के बीच स्थित भगवान अयप्पा की पावन स्थली सबरीमाला मंदिर एक बार फिर से दिव्य उल्लास और भक्ति के रंग में रंग चुकी है। आगामी वार्षिक मंडलम-मकरविलक्कू तीर्थयात्रा सत्र के शुभारंभ से ठीक पहले, रविवार को मंदिर में एक बेहद पवित्र, पारंपरिक और आध्यात्मिक प्रक्रिया के तहत नए मुख्य पुजारियों का चयन किया गया। यह चयन केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि उस अलौकिक आस्था और विश्वास का जीवंत प्रतीक है, जो सदियों से इस महान मंदिर की परंपरा का हिस्सा रहा है।
पर्ची निकालकर की गई इस पारदर्शी और पवित्र चयन प्रक्रिया में अरीक्कारा सुब्रमण्यम शंकरन नंबूथिरी को सबरीमाला भगवान अयप्पा मंदिर का नया ‘मेलशांति’ (मुख्य पुजारी) चुना गया है। इसके साथ ही, सबरीमाला से कुछ ही दूरी पर स्थित मलिकप्पुरम देवी मंदिर के नए मुख्य पुजारी के रूप में ई. दामोदरन नंबूदरी को यह सौभाग्य प्राप्त हुआ है। सुबह की विशेष पूजा-अर्चना के बाद बच्चों के हाथों से पर्ची निकलवाकर यह दिव्य फैसला लिया गया, जिसमें सबरीमाला के लिए सात नामों पर विचार हुआ था।
इस चयन के पीछे की कहानी पूरी तरह से अटूट श्रद्धा और ईश्वर के प्रति समर्पण से जुड़ी है। तिरुवनंतपुरम के रहने वाले शंकरन नंबूथिरी वर्तमान में राजधानी के प्रसिद्ध पझावंगडी गणपति मंदिर में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय वह पूरी तरह से भगवान गणपति और अपने गुरुओं के आशीर्वाद को देते हैं।
मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने साझा किया कि वर्ष 2020 से वह पझावंगडी गणपति मंदिर के मुख्य पुजारी के रूप में सेवा दे रहे हैं और भारतीय सेना के प्रबंधन के अंतर्गत आने वाले इस मंदिर से अनुमति मिलने के बाद ही उन्होंने इस बार आवेदन किया था। उनका यह विश्वास आस्था की उस शक्ति को दर्शाता है, जहां इंसान केवल निमित्त मात्र होता है और सब कुछ उस सर्वशक्तिमान की मर्जी से तय होता है।
दूसरी ओर, कोझिकोड के वडकरा के रहने वाले दामोदरन नंबूदरी वर्तमान में कीझूर स्थित भगवान शिव मंदिर में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ये दोनों ही पुण्यात्मा आगामी 16 नवंबर को एक वर्ष के कार्यकाल के लिए अपने-अपने मंदिरों में पवित्र कार्यभार संभालेंगे। इसके ठीक अगले दिन मंडलम-मकरविलक्कु तीर्थयात्रा सत्र के लिए मंदिर के कपाट देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए जाएंगे।
सबरीमाला की यह पूरी यात्रा और मुख्य पुजारी चुने जाने की यह परंपरा भक्तों के मन में भगवान अयप्पा के प्रति अगाध आस्था को और प्रगाढ़ करती है। त्रिशूर के निवर्तमान मेलशांति प्रसाद ई.डी. और कोल्लम के मनु नंबूदरी एम.जी. के बाद अब शंकरन नंबूथिरी और दामोदरन नंबूदरी का यह चयन स्वामी अयप्पा के दरबार में नई ऊर्जा और भक्ति का संचार करेगा। ‘स्वामी शरणम्’ के जयकारों के साथ गूंजने वाली यह भूमि एक बार फिर से करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनने के लिए पूरी तरह तैयार है।


