Close Menu
Ocean PostOcean Post
  • होम
  • झारखंड
    • विचार
    • स्वास्थ्य
  • बिहार
  • राजनीति
  • कारोबार
  • देश/दुनिया
  • मीडिया
  • ओसियन स्पेशल
  • रेलवे
Facebook X (Twitter) Instagram Threads
Ocean PostOcean Post
  • होम
  • झारखंड
    • विचार
    • स्वास्थ्य
  • बिहार
  • राजनीति
  • कारोबार
  • देश/दुनिया
  • मीडिया
  • ओसियन स्पेशल
  • रेलवे
Ocean PostOcean Post
  • होम
  • झारखंड
  • बिहार
  • राजनीति
  • कारोबार
  • देश/दुनिया
  • मीडिया
  • ओसियन स्पेशल
  • रेलवे
Home » दोहरी नीति का शिकार रिम्स: एक तरफ पूर्व निदेशक को तुरंत मिला प्रभार, तो दूसरी तरफ अनुभवी डॉक्टरों की नियुक्ति पर सरकार की चुप्पी से उठ रहे गंभीर सवाल
झारखंड

दोहरी नीति का शिकार रिम्स: एक तरफ पूर्व निदेशक को तुरंत मिला प्रभार, तो दूसरी तरफ अनुभवी डॉक्टरों की नियुक्ति पर सरकार की चुप्पी से उठ रहे गंभीर सवाल

Ocean News DeskBy Ocean News DeskNovember 4, 2026
Share Facebook Twitter WhatsApp Telegram Copy Link
Share
Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

रांची.  रांची के राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में सेवानिवृत्त चिकित्सकों की अनुबंध पर नियुक्ति को लेकर व्यवस्था का एक बेहद विरोधाभासी और चौंकाने वाला चेहरा सामने आया है। एक तरफ जहां प्रशासनिक गलियारों में नजदीकियों और चुनिंदा पदों पर नियमों को ताक पर रखकर तुरंत लाभ पहुंचा दिया जाता है, वहीं दूसरी तरफ आम मरीजों के बेहतर इलाज से जुड़े बेहद अहम फैसलों को लाल फीताशाही और नियमों के नाम पर लटका दिया जाता है। इस पूरे प्रकरण ने संस्थान के संचालन के साथ-साथ इस पर नियंत्रण रखने वाली राज्य सरकार की कार्यप्रणाली और मंशा पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

पूर्व निदेशक को मिला था विशेष लाभ

इस दोहरे रवैये की सबसे बड़ी मिसाल पूर्व निदेशक डॉ. डीके सिन्हा का मामला है। उन्हें सेवानिवृत्ति के ठीक अगले ही दिन दोबारा निदेशक पद का प्रभार सौंप दिया गया था। प्रशासनिक फेरबदल और उच्च स्तर पर निर्णयों की ऐसी तत्परता यह बताने के लिए काफी है कि जब सरकार या प्रशासन किसी को उपकृत करना चाहे, तो तमाम नियम और प्रक्रियाएं पलक झपकते ही अनुकूल हो जाती हैं।

मरीजों के हितों की अनदेखी और अटकी फाइलें

इसके विपरीत, आम जनता और गंभीर रोगियों के स्वास्थ्य हितों से जुड़े फैसलों के साथ पूरी तरह उदासीनता बरती जा रही है। रिम्स शासी परिषद की बैठक में यह स्पष्ट निर्णय लिया गया था कि संस्थान में मरीजों को विश्वस्तरीय इलाज मुहैया कराने के लिए दो अनुभवी और वरिष्ठ चिकित्सकों, न्यूरोसर्जरी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. सीबी सहाय (अक्टूबर 2023 में सेवानिवृत्त) और मेडिसिन विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. विद्यापति (अगस्त 2024 में सेवानिवृत्त) को अनुबंध पर सेवा विस्तार दिया जाए।

परिषद ने माना था कि इन दोनों डॉक्टरों के लंबे अनुभव का लाभ रिम्स के मरीजों को मिलेगा। इसके बावजूद, यह प्रस्ताव कागजों से बाहर नहीं निकल पाया है।

सरकार की भूमिका पर गंभीर सवाल

अब सबसे बड़ा और गंभीर सवाल राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर उठता है:

  • नियमों का बहाना क्यों? जब एक उच्च पदस्थ अधिकारी को रिटायरमेंट के तुरंत बाद पद पर बनाए रखने के लिए प्रशासनिक और कानूनी रास्ते आसानी से निकाल लिए जाते हैं, तो क्या वही सरकार जनता का इलाज करने वाले वरिष्ठ और विशेषज्ञ डॉक्टरों के लिए कोई स्पष्ट नियमावली या मार्ग नहीं बना सकती?

  • दोहरे मापदंड क्यों अपनाए जा रहे हैं? क्या सरकार की प्राथमिकताएं आम मरीजों के स्वास्थ्य और अस्पताल की चिकित्सा गुणवत्ता से ज्यादा राजनीतिक या प्रशासनिक नफे-नुकसान तय करती हैं?

  • जिम्मेदार कौन? शासी परिषद के फैसलों और सरकार के मौखिक आश्वासनों के बावजूद यदि महीनों और वर्षों तक फाइलें अटकी रहती हैं, तो इसके लिए जवाबदेह कौन है?

रिम्स जैसे बड़े संस्थान में यदि स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी पर लाना है, तो सरकार को अपनी इस दोहरी नीति और उदासीनता को त्यागना होगा। अनुभवी चिकित्सकों की नियुक्ति के रास्ते में आ रही तकनीकी बाधाओं को दूर करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है, ताकि आम और गरीब मरीजों को बेहतर चिकित्सा का लाभ मिल सके।

Hindi News Jharkhand News RIMS Ranchi झारखंड स्वास्थ्य विभाग डॉक्टर नियुक्ति विवाद रिम्स रांची स्वास्थ्य सेवाएं हेमंत सरकार
Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
Previous Articleगंभीर सवाल: बलात्कार के आरोपी अतिरिक्त जिला जज कर रहे थे पॉक्सो मामलों की सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से मांगा जवाब
Next Article मेधा का दुरुपयोग!, आईआईटी कानपुर से पासआउट अरुण कुमार निकला झारखंड पेपर लीक का ‘मास्टरमाइंड’, 15-15 लाख में बेचे गए थे प्रश्न पत्र
Ocean News Desk
  • Website

Ocean Post का आधिकारिक News Desk, जो पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और सबसे तेज़ ख़बरें पहुंचाने के लिए समर्पित है. हमारी अनुभवी एडिटोरियल टीम 24 घंटे देश-दुनिया, राजनीति, मनोरंजन, खेल और समसामयिक मुद्दों पर पैनी नज़र रखती है. हमारा प्रयास है कि पाठकों को भरोसेमंद और उच्च गुणवत्ता वाली जानकारी दी जा सके.

Related Posts

झारखंड

भ्रष्टाचार का अड्डा बना शिक्षा विभाग: ट्रांसफर-पोस्टिंग और आरटीई एडमिशन में धांधली के खिलाफ निरसा विधायक अरूप चटर्जी बैठे अनशन पर

November 4, 2026
झारखंड

झारखंड में बदला मौसम का मिजाज: बादलों की विदाई के साथ बढ़ेगी ठिठुरन, अगले कुछ दिनों में तेजी से गिरेगा रात का पारा

November 4, 2026
झारखंड

मेधा का दुरुपयोग!, आईआईटी कानपुर से पासआउट अरुण कुमार निकला झारखंड पेपर लीक का ‘मास्टरमाइंड’, 15-15 लाख में बेचे गए थे प्रश्न पत्र

November 4, 2026
Add A Comment
Leave A Reply Cancel Reply

अभी-अभी

भ्रष्टाचार का अड्डा बना शिक्षा विभाग: ट्रांसफर-पोस्टिंग और आरटीई एडमिशन में धांधली के खिलाफ निरसा विधायक अरूप चटर्जी बैठे अनशन पर

November 4, 2026

झारखंड में बदला मौसम का मिजाज: बादलों की विदाई के साथ बढ़ेगी ठिठुरन, अगले कुछ दिनों में तेजी से गिरेगा रात का पारा

November 4, 2026

मेधा का दुरुपयोग!, आईआईटी कानपुर से पासआउट अरुण कुमार निकला झारखंड पेपर लीक का ‘मास्टरमाइंड’, 15-15 लाख में बेचे गए थे प्रश्न पत्र

November 4, 2026

दोहरी नीति का शिकार रिम्स: एक तरफ पूर्व निदेशक को तुरंत मिला प्रभार, तो दूसरी तरफ अनुभवी डॉक्टरों की नियुक्ति पर सरकार की चुप्पी से उठ रहे गंभीर सवाल

November 4, 2026

गंभीर सवाल: बलात्कार के आरोपी अतिरिक्त जिला जज कर रहे थे पॉक्सो मामलों की सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से मांगा जवाब

November 4, 2026
Advertisement
Ocean Post
Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
  • About Us oceanpost
  • Advertise With Us
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • Contact
© 2026 Ocean Post. Designed by Launching Press.

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

Join OceanPost