रांची: झारखंड के सरकारी विद्यालयों में हजारों युवाओं के शिक्षक बनने का सपना जल्द पूरा हो सकता है। स्नातक स्तरीय प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के तहत हाईस्कूल शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े मामले में झारखंड हाईकोर्ट में सभी पक्षों की लंबी बहस के बाद सुनवाई पूरी कर ली गई है। अदालत ने इस महत्वपूर्ण मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिससे राज्य के हजारों अभ्यर्थियों की निगाहें अब न्यायपालिका के अगले कदम पर टिक गई हैं।
करीब 17,752 पदों पर होनी है नियुक्तियां
वर्ष 2016 में शुरू हुई इस पूरी नियुक्ति प्रक्रिया के माध्यम से राज्यभर में कुल 17,752 पदों पर शिक्षकों की बहाली की जानी है। हालांकि, लंबी कानूनी अड़चनों और विभिन्न अनियमितताओं के आरोपों के कारण प्रक्रिया में लगातार देरी होती रही है। वर्तमान स्थिति यह है कि लगभग 10,000 पदों पर पहले ही नियुक्तियां पूरी हो चुकी हैं, जबकि शेष रिक्त पदों को भरने के लिए इस अंतिम फैसले का इंतजार किया जा रहा था।
सुनवाई के दौरान रखे गए मुख्य बिंदु
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में अभ्यर्थियों की ओर से पैरवी कर रहे वकीलों ने तर्क दिया कि मूल परीक्षा के परिणाम और मेरिट लिस्ट तैयार करने में नियमों की अनदेखी की गई थी। आरोप लगाया गया कि कई अभ्यर्थियों को कम अंक मिलने के बावजूद सूची में जगह दी गई, जबकि अधिक अंक पाने वाले योग्य छात्र बाहर हो गए। वहीं, दूसरी ओर कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) और राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए पूरी चयन प्रक्रिया को नियमों के दायरे में और पारदर्शी बताया गया।
अभ्यर्थियों में जगी उम्मीद की किरण
हाईकोर्ट के इस फैसले से उन हजारों योग्य अभ्यर्थियों में नई उम्मीद जाग गई है जो लंबे समय से नियुक्ति पत्र मिलने का इंतजार कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि अदालत अपने फैसले में क्या निर्देश देती है, जिससे शेष बचे पदों पर बहाली का रास्ता पूरी तरह साफ हो सके।


