जमशेदपुर. बागबेड़ा थाना क्षेत्र में कानून-व्यवस्था और पुलिसिया गश्त के दावों की हवा निकल चुकी है. इलाके में पुलिस की भूमिका सुरक्षा देने से ज्यादा महज खानापूर्ति और अवैध धंधों से होने वाली उगाही तक सीमित होकर रह गई है. ताजा मामला बागबेड़ा कॉलोनी पंचायत अंतर्गत ब्लॉक नंबर 14/2/3, रोड नंबर-1 (पानी टंकी के सामने) का है, जहां इलाज कराने रांची गए सेवानिवृत्त आर्मी जवान श्रवण कुमार (पिता- प्रभा कुंवर) के बंद घर को चोरों ने निशाना बनाया.
मंगलवार शाम जब वे अस्पताल से लौटे तो घर के ताले टूटे मिले. चोरों ने करीब 32 लाख रुपये के सोने-चांदी के गहने, बर्तन, पंखे, इनवर्टर, टीवी, मोटर, नल, यहां तक कि बिजली के बोर्ड-स्विच तक उखाड़ लिए. इतना ही नहीं, सेना से जुड़े दस्तावेज, जमीन के कागजात और बैंक पेपर्स भी गायब हैं.
हर माह टूट रहे ताले, बागबेड़ा रोड नंबर एक में दूसरी चोरी
यह घटना सिर्फ एक चोरी नहीं, बल्कि बागबेड़ा पुलिस की कार्यशैली पर सीधा करारा तमाचा है. बागबेड़ा का रोड नंबर एक कोई सुनसान इलाका नहीं, बल्कि एक ‘प्राइम रोड’ है जहां चौबीसों घंटे आवाजाही बनी रहती है. ऐसे मुख्य रास्ते पर स्थित घर में घुसकर चोर घंटों तक आराम से एक-एक सामान खंगालते रहे और वाहनों में लादकर सामान समेटते रहे, लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी. बिना किसी स्थानीय मिलीभगत या चोरों के मजबूत नेटवर्क के इतनी बड़ी वारदात को अंजाम देना कतई मुमकिन नहीं है.
जनता की मांगें :
त्वरित कार्रवाई व रिकवरी: बागबेड़ा रोड नंबर-1 में हुई चोरी में शामिल गिरोह का पर्दाफाश कर चोरी गए गहने, नकदी और कागजात जल्द से जल्द बरामद किए जाएं.
सघन पुलिस गश्त: सायरन बजाकर औपचारिकता निभाने के बजाय संवेदनशील और व्यस्त मार्गों पर प्रभावी व व्यावहारिक रात्रि गश्त सुनिश्चित की जाए.
अवैध अड्डों पर नकेल: रेलवे जमीन पर संचालित अवैध गतिविधियों और अड्डों पर कड़ी कार्रवाई हो, जहां से आपराधिक वारदातों की योजना बनने की आशंका है.
इलाके में पिछले छह महीनों में तीन से चार घरों के ताले टूट चुके हैं. हर बार वारदात के बाद पुलिस मौका-मुआयना करती है और जांच के नाम पर लकीर पीटकर शांत बैठ जाती है. बागबेड़ा पुलिस के पास ऐसा कोई खुफिया या जन-सूचना तंत्र मौजूद ही नहीं है, जिससे किसी इलाके में संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधियों की जानकारी समय रहते उन तक पहुंच सके.
सायरन बजाकर रात भर किसे आगाह करती है पुलिस!
जनता के पैसों से पेट्रोल-डीजल फूंककर सड़कों पर दौड़ने वाली पुलिस की मोबाइल गाड़ियां अब सुरक्षा का भरोसा देने के बजाय सायरन बजाकर गश्त लगाती हैं. ऐसा लगता है मानो सायरन बजाकर चोरों को पहले से ही आगाह किया जा रहा हो कि पुलिस किस तरफ आ रही है ताकि वे आराम से छिप सकें या भाग निकलें.
स्थानीय लोगों का साफ आरोप है कि पुलिस का पूरा ध्यान क्षेत्र की सुरक्षा पर नहीं, बल्कि आसपास बसी अवैध बस्तियों में फल-फूल रहे अवैध धंधों पर है. पुलिस की गाड़ियां और जवान प्रतिदिन इन अवैध अड्डों पर चक्कर लगाते देखे जाते हैं, लेकिन अपराध रोकने के लिए नहीं, बल्कि अपने ‘खास मकसद’ के लिए. इलाके के लोगों का मानना है कि इन्हीं अवैध अड्डों पर चोरी की बड़ी वारदातों की पटकथा लिखी जाती है. जब पुलिस ही इन अड्डों पर मेहरबान रहेगी, तो अपराध पर अंकुश कैसे लगेगा ?
घटना की जानकारी मिलते ही पंचायत के मुखिया राजकुमार गोड, उप मुखिया संतोष ठाकुर, पंसस सुनील गुप्ता, वार्ड प्रतिनिधि राकेश सिंह एवं राजकुमार सिंह तुरंत मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचित किया. जहां जनप्रतिनिधियों ने अपनी जिम्मेदारी और तत्परता दिखाई, वहीं पुलिस की सुस्ती सवाल खड़े करती है.
जनप्रतिनिधियों ने घटना पर रोष जताया और पुलिस प्रशासन से चोरों की जल्द गिरफ्तारी और सामान बरामदगी की मांग की है. यदि बागबेड़ा में पुलिस गश्त का ढोंग बंद कर अवैध अड्डों पर नकेल नहीं कसी गई और चोरों के इस नेटवर्क को ध्वस्त नहीं किया गया, तो आम जनता का पुलिस प्रशासन से भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा.



