धनबाद. झारखंड के धनबाद जिले में शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलती एक गंभीर तस्वीर सामने आई है। शिक्षा विभाग में फैले भारी भ्रष्टाचार, मनमाने तरीके से हो रहे शिक्षकों के तबादले और आरटीई (RTE) एडमिशन में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ियों के विरोध में निरसा के माकपा विधायक अरूप चटर्जी ने मोर्चा खोल दिया है। विधायक ने जिला मुख्यालय स्थित उपायुक्त कार्यालय के समक्ष अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। इस आंदोलन के जरिए सीधे तौर पर शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं।
तीन करोड़ के भ्रष्टाचार और पैसों के खेल का आरोप
भूख हड़ताल पर बैठे विधायक अरूप चटर्जी ने आरोप लगाया है कि शिक्षा विभाग पूरी तरह से बिचौलियों और भ्रष्टाचार के चंगुल में फंस चुका है। पिछले एक साल के दौरान सरकारी स्कूलों में हुए अंतर-जिला ट्रांसफर, शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति और मनचाही पोस्टिंग के नाम पर लगभग तीन करोड़ रुपये का भारी-भरकम लेन-देन किया गया है।
उन्होंने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि शहरी क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षकों को बीस प्रतिशत एचआरए (HRA) का लाभ मिलता है, जिसके चलते लाखों रुपये घूस लेकर प्रभावशाली लोगों की मनचाहे शहरी स्कूलों में पोस्टिंग करा दी गई। इसका नतीजा यह हुआ कि ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात पूरी तरह बिगड़ गया है। गांवों के स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है, जिससे गरीब बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप पड़ गई है और उनका भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है।
आरटीई एडमिशन में भी गरीबों के अधिकारों की लूट
विभागीय भ्रष्टाचार सिर्फ शिक्षकों के तबादले तक ही सीमित नहीं है, बल्कि निजी स्कूलों में बीपीएल (BPL) श्रेणी के तहत मिलने वाले मुफ्त एडमिशन में भी जमकर धांधली की गई है। विधायक ने आरोप लगाया कि पैसे वालों और संपन्न परिवारों के बच्चों को आरटीई के तहत गरीबों की सीटें बेच दी गईं। तय मानकों और दूरी के नियमों को ताक पर रखकर उन परिवारों के बच्चों का दाखिला कराया गया, जिनके माता-पिता पहले से सरकारी नौकरियों में हैं।
प्रशासनिक चुप्पी और गैर-जिम्मेदार रवैया
इस पूरे प्रकरण में जिला प्रशासन की भूमिका भी कटघरे में खड़ी हो गई है। विधायक का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में अगस्त महीने से ही जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) शालिनी डुंगडुंग से मिलकर आरटीआई (RTI) के तहत तमाम जानकारियां मांगी थीं, लेकिन विभाग ने लीपापोती करते हुए कोई ठोस जवाब नहीं दिया। कई बार धनबाद के उपायुक्त आदित्य रंजन और शिक्षा सचिव को भी इस गंभीर भ्रष्टाचार से अवगत कराया गया, परंतु जिम्मेदार अधिकारियों की तरफ से कोई भी ठोस पहल या कार्रवाई नहीं की गई।
विधायक ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक ग्रामीण स्कूलों को पर्याप्त शिक्षक नहीं मिलते, ट्रांसफर-पोस्टिंग के खेल की उच्चस्तरीय जांच नहीं होती और आरटीई एडमिशन सूची की पारदर्शी समीक्षा नहीं की जाती, तब तक उनका यह संघर्ष और अनशन जारी रहेगा। इस विरोध प्रदर्शन में पूर्व सिंदरी विधायक आनंद महतो समेत कई अन्य लोग भी उपस्थित रहे।


