रांची. झारखंड में अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदलने जा रहा है। मानसून की विदा के बाद अब बंगाल की खाड़ी में सक्रिय एक नए मौसमी सिस्टम का असर राज्य के कई हिस्सों में साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, आज (27 अक्टूबर) से लेकर 30 अक्टूबर तक राज्य के विभिन्न जिलों में तेज हवाओं, गरज-चमक, आंधी-वज्रपात और भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इस बदलाव को देखते हुए मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
16 जिलों में आंधी-वज्रपात की चेतावनी
मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, आज 27 अक्टूबर को झारखंड के 16 प्रमुख जिलों में गरज-चमक के साथ आंधी और वज्रपात का सबसे ज्यादा खतरा रहेगा। प्रभावित होने वाले इन जिलों में रांची, हजारीबाग, बोकारो, धनबाद, गुमला, खूंटी, सिमडेगा, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, देवघर, दुमका, गोड्डा, साहिबगंज, पाकुड़ और जामताड़ा शामिल हैं।
इन क्षेत्रों में अचानक मौसम बदल सकता है। कुछ स्थानों पर हल्के से मध्यम बादल छाने के साथ बौछारें पड़ने की आशंका है, जबकि कुछ इलाकों में तेज हवाओं के साथ बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं। हालांकि, यह जरूरी नहीं है कि चेतावनी वाले जिलों के हर एक हिस्से में एक जैसी बारिश हो; स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार प्रभाव अलग-अलग हो सकता है।
28 अक्टूबर को बढ़ेगा बारिश का दायरा
बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम का असर 28 अक्टूबर को और अधिक गहरा सकता है। इस दिन राज्य में बारिश की गतिविधियों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की आशंका है। मध्य झारखंड के जिलों—जैसे रांची, रामगढ़, बोकारो और हजारीबाग के साथ-साथ दक्षिणी झारखंड के पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम तथा सरायकेला-खरसावां में भी व्यापक वर्षा हो सकती है। कुछ चुनिंदा इलाकों में भारी बारिश के भी आसार हैं, जिससे सड़क यातायात और दैनिक गतिविधियों पर हल्का असर पड़ सकता है।
29 और 30 अक्टूबर को भी जारी रहेगा खराब मौसम का दौर
मौसम का यह उतार-चढ़ाव यहीं नहीं थमेगा। पूर्वानुमान के अनुसार, 29 अक्टूबर को पलामू, गढ़वा, लातेहार और चतरा समेत राज्य के कई अन्य इलाकों में भी भारी बारिश का खतरा बना रहेगा। इसके अलावा रांची और उसके आसपास के जिलों में भी बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है।
क्रमशः 30 अक्टूबर को भी कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ बारिश की स्थिति बनी रहने की संभावना है। लगातार बारिश होने से निचले इलाकों में जलभराव, ग्रामीण सड़कों पर आवाजाही में कठिनाई और खेती-किसानी के कामों में बाधा उत्पन्न हो सकती है।
नागरिकों के लिए जरूरी एहतियात
मौसम विभाग और प्रशासनिक एक्सपर्ट्स ने खराब मौसम के दौरान लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। विशेष तौर पर खुले मैदानों, खेतों में काम करने वाले किसानों और पेड़ों के नीचे रहने वाले लोगों को वज्रपात (आकाशीय बिजली) के समय सतर्क रहना चाहिए। गरज-चमक और आंधी के दौरान पक्के मकानों या सुरक्षित स्थानों पर शरण लें, बिजली के खंभों तथा बड़े पेड़ों के पास खड़े होने से बचें।


