रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रारंभिक परीक्षा (PT) में चयन को लेकर हुए एक बड़े फर्जीड़े का खुलासा हुआ है, जिसमें एक सुनियोजित ‘सिंडिकेट’ के जरिए पूरी चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने का मामला सामने आया है। सीबीआई (CBI) की चल रही जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य और परतें उघड़ कर सामने आ रही हैं, जिससे प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
लैपटॉप से मिली चयनित अभ्यर्थियों की गुप्त सूची
जांच के दौरान मुख्य आरोपियों में से एक के लैपटॉप और बैग से एक बेहद संवेदनशील दस्तावेज बरामद हुआ है। इस गोपनीय सूची में 15 ऐसे अभ्यर्थियों के नाम, रोल नंबर और इंटरव्यू तिथि के साथ उनके नाम के आगे डीएसपी (DSP) और जेएसएसएस जैसे महत्वपूर्ण पदों का विवरण दर्ज पाया गया है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस संदिग्ध चार्ट में शामिल 15 में से 10 अभ्यर्थियों का अंतिम रूप से चयन भी हो चुका है। सूची का मिलान जब अंतिम परिणाम से किया गया, तो इसमें शत-प्रतिशत समानता पाई गई, जिससे यह साफ हो गया कि चयन प्रक्रिया में भारी पैमाने पर धांधली हुई थी। इस सूची में शामिल कई चर्चित नाम और उनके रसूखदारों के साथ सांठगांठ की बात भी सामने आ रही है।
सिंडिकेट का कार्य करने का तरीका (Modus Operandi)
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस पूरे घोटाले को अंजाम देने के लिए एक संगठित गिरोह यानी सिंडिकेट काम कर रहा था। इस गिरोह का तरीका बेहद शातिर था:
दलालों और अधिकारियों की साठगांठ: परीक्षा सामग्री के रखरखाव से लेकर ओएमआर (OMR) शीट के मूल्यांकन तक में सुनियोजित तरीके से सेंध लगाई जाती थी।
उत्तर पुस्तिका में बाद में बदलाव: कई परीक्षा केंद्रों पर ओएमआर शीट को या तो खाली छोड़ दिया जाता था या परीक्षा के बाद उसमें सही उत्तर भरकर नंबर बढ़ा दिए जाते थे।
सीसीटीवी फुटेज से खुला राज: जब सीबीआई ने संबंधित परीक्षा केंद्रों के सीसीटीवी फुटेज की तकनीकी जांच की, तो कई सनसनीखेज खुलासे हुए। फुटेज में साफ दिखा कि जिन अभ्यर्थियों ने परीक्षा हॉल में केवल 49 या 30 प्रश्न ही सही हल किए थे, उनकी ओएमआर शीट में बाद में 98 से 92 तक सही उत्तर दर्ज कर दिए गए, जिससे वे आसानी से पीटी परीक्षा पास कर गए।
भ्रष्टाचार के तार और पैसों का लेन-देन
सीबीआई की जांच में यह भी सामने आया है कि तत्कालीन अध्यक्ष, उप परीक्षा नियंत्रक और कुछ बाहरी दलालों की मिलीभगत से यह पूरा खेल खेला गया। पास कराने के एवज में करोड़ों रुपए की अवैध डील तय होती थी। भ्रष्टाचार के इस मकड़जाल में कई बड़े नाम और ब्लैकलिस्टेड कंपनियों के लोगों के शामिल होने के पुख्ता प्रमाण मिले हैं।
इस बड़े खुलासे के बाद से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं में भारी आक्रोश है। छात्र संगठन और विपक्षी दल पूरी चयन प्रक्रिया की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच तथा दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।


