नई दिल्ली: देश में चुनावी शुचिता और निष्पक्षता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और एसआईआर (SIR) से जुड़े हालिया विवादों के बीच शीर्ष अदालत ने साफ कर दिया है कि वह चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने से पीछे नहीं हटेगी यदि लोकतंत्र को अवैध या असंवैधानिक तरीकों से दूषित करने की कोशिश की जाएगी। अदालत ने दो टूक शब्दों में कहा कि उसके हाथ बंधे हुए नहीं हैं।
YSRCP की याचिका पर सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणी
यह अहम टिप्पणी जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने आंध्र प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी ‘युवजन श्रमिक रायतू कांग्रेस पार्टी’ (YSRCP) द्वारा दायर की गई एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की। विपक्षी दल ने आरोप लगाया था कि राज्य में बड़े पैमाने पर हिंसा और बिगड़ी हुई कानून-व्यवस्था के कारण उनके उम्मीदवारों को शहरी स्थानीय निकाय चुनावों (Urban Local Body elections) के लिए नामांकन दाखिल करने से बलपूर्वक रोका गया।
पार्टी द्वारा पेश किए गए वीडियो साक्ष्यों और इलेक्ट्रॉनिक ज्ञापनों को गंभीरता से लेते हुए बेंच ने माना कि प्रथम दृष्टया नामांकन प्रक्रिया की अखंडता से खिलवाड़ किया गया है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव भारतीय संविधान के मूल ढांचे का अहम हिस्सा हैं और इसमें जनता का अटूट विश्वास बना रहना एक जीवंत लोकतंत्र के लिए अनिवार्य शर्त है।
आंध्र प्रदेश राज्य चुनाव आयोग (SEC) को निर्देश
मामلي की नज़ाकत को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत प्रदान करते हुए आंध्र प्रदेश राज्य चुनाव आयोग (SEC) को कई अहम निर्देश जारी किए हैं:
नामांकन पर विचार: अदालत ने SEC को निर्देश दिया कि वह YSRCP की उस मांग पर गंभीरता से विचार करे जिसमें हिंसा के चलते नामांकन की समय-सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया गया है।
सूची के प्रकाशन पर रोक: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 21 अक्टूबर को उम्मीदवारों की जो अंतिम सूची जारी होनी थी, उसे तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाए और अब इसे 23 अक्टूबर तक टाल दिया जाए।
न्यायिक समीक्षा का अधिकार: पीठ ने स्पष्ट किया कि हालांकि अदालतें आमतौर पर चुनावी मामलों में न्यायिक संयम बरतती हैं ताकि संवैधानिक निकाय स्वतंत्र रूप से काम कर सकें, लेकिन जब बात चुनाव प्रक्रिया को अवैध तरीकों से प्रभावित करने की हो, तो अदालतें अपनी न्यायिक समीक्षा की शक्ति से आंखें नहीं मूंद सकतीं।
हाईकोर्ट से राहत न मिलने पर पहुंचा था सुप्रीम कोर्ट
इससे पहले YSRCP ने राज्य में हिंसा की आशंका जताते हुए आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, 15 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने पूर्व-सुरक्षात्मक उपायों और नामांकन की समय-सीमा बढ़ाने संबंधी याचिकाओं को खारिज कर दिया था। इसके बाद पार्टी ने न्याय की गुहार लगाते हुए सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया, जहां राज्य सरकार और एसईसी के विरोध के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को समझते हुए पार्टी को बड़ी राहत दी है। इस फैसले को चुनावी राजनीति और निष्पक्षता के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।


