रांची. झारखंड के राजनीतिक गलियारों और हर दिल को झकझोर देने वाली एक बेहद मर्माहत कर देने वाली खबर सामने आई है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी मां रूपी सोरेन के अंतिम संस्कार के सभी पवित्र अनुष्ठान और संस्कार भोज संपन्न कराने के बाद, अपने पैतृक गांव नेमरा से भारी मन और नम आंखों के साथ रांची लौट आए हैं.
मां की स्मृतियों का अनंत शून्य और रजरप्पा में अस्थि विसर्जन
बीती 7 अक्टूबर 2026 की उस मनहूस रात ने झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक दिवंगत शिबू सोरेन के परिवार को अपूरणीय क्षति दी थी, जब माता रूपी सोरेन का रांची में निधन हो गया था. इसके बाद से ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन लगातार अपने पैतृक गांव रामगढ़ जिले के नेमरा में ही डेरा डाले हुए थे.
मां के पार्थिव शरीर को खुद मुखाग्नि देने के बाद, मुख्यमंत्री ने परंपरा और रीति-रिवाजों के हर एक चरण को पूरी निष्ठा से निभाया. गत 18 अक्टूबर को नेमरा में ही माता का संस्कार भोज संपन्न हुआ, जिसमें आम से लेकर खास और देश-दुनिया के कई गणमान्य लोग शामिल हुए. इसके अगले ही चरण में, आज मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रजरप्पा स्थित दामोदर और भैरवी नदी के संगम पर स्थित जाड्ंग बाहा तुपुनाई घाट पर अपनी दिवंगत मां की अस्थियां पूरी श्रद्धा और भावुकता के साथ विसर्जित कीं. मां के जाने के इस गहरे आघात से उपजा सूनापन हर किसी की आंखें नम कर रहा है.
भाई बसंत सोरेन की सेहत और सिंगापुर यात्रा की सुगबुगाहट
एक तरफ जहां मुख्यमंत्री अपनों के बिछड़ने के गम से उबरने का प्रयास कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ परिवार की चिंताएं अभी थमी नहीं हैं. मां के निधन के बाद अब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के छोटे भाई और दुमका के विधायक बसंत सोरेन की खराब सेहत ने परिजनों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. बसंत सोरेन का वर्तमान में सिंगापुर के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है. हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर मुख्यमंत्री के सिंगापुर जाने का कोई निश्चित कार्यक्रम जारी नहीं हुआ है, किंतु सूत्रों के अनुसार वे अपने भाई का हालचाल जानने और ढांढस बंधाने जल्द ही सिंगापुर की यात्रा पर जा सकते हैं.


