मेरठ के चर्चित ‘नीला ड्रम कांड’ और सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाते हुए मुख्य दोषी पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को मौत की सजा सुनाई है. इस रोंगटे खड़े कर देने वाले हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था. लगभग 126 तारीखों तक चली लंबी अदालती सुनवाई के बाद 30 सितंबर को दोनों को दोषी करार दिया गया था, जिसके बाद अब कोर्ट ने उन्हें फांसी के फंदे पर लटकाने का फरमान जारी किया है.
मौत के खौफ से बेचैन दिखे कातिल
सलाखों के पीछे पहुंचे इन दोनों हत्यारों के हौसले सजा का ऐलान नजदीक आते ही पस्त हो गए थे. वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा के मुताबिक, फांसी की सजा सुनाए जाने से दो दिन पहले से ही मुस्कान और साहिल की रातों की नींद उड़ चुकी थी. दोनों मानसिक रूप से बेहद परेशान और बेचैन नजर आ रहे थे. हालात यह थे कि उन्होंने मंगलवार की रात और बुधवार की सुबह बमुश्किल कुछेक कौर ही खाया था. जेल में हमेशा खेती-बाड़ी के काम में सक्रिय रहने वाला साहिल भी पिछले कुछ दिनों से यह कहकर काम से दूर हो गया था कि अब उसे सजा मिलने वाली है.
दिल दहला देने वाली वारदात का सच
यह खौफनाक वारदात 3 मार्च 2025 की रात को अंजाम दी गई थी. शातिर पत्नी मुस्कान ने अपने ही पति सौरभ राजपूत को पहले नशे की गोलियां (मादक पदार्थ) देकर पूरी तरह बेहोश कर दिया. इसके बाद अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर बेरहमी से चाकू से गोदकर उसकी हत्या कर दी.वानियत यहीं नहीं रुकी; साक्ष्यों को छिपाने और पहचान मिटाने के लिए उन्होंने सौरभ के शव के कई टुकड़े किए और उन्हें एक नीले ड्रम में ठूंसकर ऊपर से सीमेंट से पूरी तरह सील कर दिया था.
मासूमों का भविष्य अधर में
इस सनसनीखेज फैसले के बाद अब दोनों दोषियों के बच्चों का भविष्य संकट में पड़ गया है. जेल प्रशासन के अनुसार, मुस्कान अपनी बड़ी बेटी (जो लगभग सात साल की है) से मिलने की बार-बार गुहार लगा रही है. जेल के नियमों के मुताबिक छह साल से अधिक उम्र का बच्चा मां के साथ नहीं रह सकता, इसलिए बड़ी बेटी बाहर है. वहीं, मुस्कान अपनी 10 महीने की उस छोटी बेटी को लेकर भी लगातार सवाल कर रही है जो इस समय उसके साथ जेल की सलाखों के पीछे ही रह रही है. बहरहाल, इस खौफनाक जुर्म के अंजाम तक पहुंचने के बाद कानून ने साबित कर दिया है कि क्रूरता का अंत हमेशा न्याय के फंदे पर ही होता है.


