JAMSHEDPUR. जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन और उनकी न्यायोचित मांगों को दबाने का एक बेहद शर्मनाक और निंदनीय मामला सामने आया है.
वेतन और बोनस जैसी अपनी बुनियादी व जायज मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपने वाले कर्मचारियों को विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा प्रताड़ित करने, उनका मनोबल गिराने और उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने की साजिश रची जा रही है.
इस तानाशाही रवैये के खिलाफ झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ ने कड़ा रुख अपनाते हुए विश्वविद्यालय प्रबंधन को दोटूक चेतावनी दी है कि यदि यह दमनकारी नीति तुरंत बंद नहीं हुई, तो महासंघ उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी.
क्या है पूरा मामला
विश्वविद्यालय में मेसर्स एवरग्रीन सर्विसेज के माध्यम से कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मियों ने समय पर वेतन और बोनस भुगतान की अपनी वैध और न्यायसंगत मांगों को लेकर अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा था.
आरोप है कि ज्ञापन सौंपने के बाद संबंधित हस्ताक्षरकर्ता कर्मचारियों को कार्यालय में बुलाकर अपमानित किया गया, उनका मनोबल गिराने का प्रयास किया गया और पूछताछ के नाम पर उनके विरुद्ध प्रतिकूल कार्रवाई का षड्यंत्र रचा गया.
यह स्थिति बेहद विडंबनापूर्ण और चिंताजनक है कि एक राज्य के अधीन संचालित प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान में यदि कर्मचारी अपने खून-पसीने की कमाई और पारिश्रमिक की मांग करें, तो उन्हें अपमान और धमकियों का सामना करना पड़े. क्या लोकतांत्रिक देश में मजदूरों और कर्मचारियों को अपनी जायज मांग रखने का भी अधिकार नहीं है?
झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ की प्रमुख मांगें (प्रबंधन के लिए सीधी चेतावनी)
- दंडात्मक कार्रवाई तत्काल निरस्त हो: संबंधित दोनों आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के विरुद्ध ज्ञापन सौंपने के कारण की गई किसी भी प्रकार की प्रतिकूल अथवा दंडात्मक कार्रवाई को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए.
- गरिमा और सुरक्षा की गारंटी: संबंधित कर्मचारियों की गरिमा, सम्मान एवं सेवा-सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तथा उन्हें किसी भी प्रकार की प्रताड़ना अथवा प्रतिशोधात्मक कार्रवाई से पूर्ण संरक्षण प्रदान किया जाए.
- लंबित वेतन व बोनस का त्वरित भुगतान: आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के लंबे समय से लंबित वेतन एवं देय बोनस के भुगतान की दिशा में अविलंब आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए.
- लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान: भविष्य में कर्मचारियों द्वारा शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी न्यायोचित मांग रखे जाने पर उनके लोकतांत्रिक एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकारों का पूरा सम्मान किया जाए, न कि उनका दमन किया जाए.
“किसी भी कर्मचारी का समय पर वेतन मांगना कोई अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि उसके श्रम, सम्मान और आजीविका से जुड़ा एक बुनियादी प्रश्न है. अपनी समस्याओं को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से प्रशासन के समक्ष रखना किसी भी परिस्थिति में प्रताड़ना अथवा प्रतिशोधात्मक कार्रवाई का आधार नहीं बनना चाहिए. संघ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा करता है. यदि प्रबंधन मनमानी से बाज नहीं आया, तो ईंट का जवाब पत्थर से दिया जाएगा.”
रवींद्र नाथ ठाकुर, स्टेट प्रेसिडेंट, झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ
विश्वविद्यालय प्रबंधन को अंतिम चेतावनी
महासंघ ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने होश में आकर कर्मचारियों के खिलाफ रची जा रही साजिशों और दंडात्मक आदेशों को तुरंत रद्द नहीं किया, तो झारखंड का पूरा कर्मचारी वर्ग सड़क पर उतरने को मजबूर होगा. शैक्षणिक संस्थानों को तानाशाही का अड्डा बनने से रोकने के लिए महासंघ किसी भी हद तक जाने को तैयार है. प्रबंधन अपनी कार्यशैली सुधारे, अन्यथा इसके गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे !




