Jamshedpur. कोल्हान के लिए कभी खौफ रहा कान्हू मुंडा अब हिंसा का रास्ता छोड़कर आम लोगों के बीच रहना चाहता है। पुरुलिया के एक मामले में जमानत मिलने के बाद करीब नौ साल की कानूनी लड़ाई के बाद वह जेल से बाहर आया और गुड़ाबांदा स्थित अपने घर पहुंचा। परिजनों और ग्रामीणों ने उसका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। कान्हू मुंडा ने कहा कि अब वह हिंसा की जिंदगी में वापस नहीं जाना चाहता। वह लोगों के बीच रहकर उनकी सेवा करना चाहता है और सक्रिय राजनीति में आने की इच्छा रखता है। कभी माओवादी संगठन का एरिया कमांडर और जोनल सचिव रह चुका कान्हू अब अपने लिए बिल्कुल अलग रास्ता चुनना चाहता है।
कान्हू मुंडा पर सरकार ने 25 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। उसके खिलाफ झारखंड में कुल 49 मामले दर्ज थे। इनमें से 49 मामलों में उसे पहले ही जमानत मिल चुकी थी। पुरुलिया के मामले में जमानत मिलने के बाद उसकी लंबे समय से चली आ रही कानूनी लड़ाई का एक और बड़ा पड़ाव पूरा हुआ।
15 फरवरी 2017 को किया था आत्मसमर्पण
कान्हू ने 15 फरवरी 2017 को सात अन्य साथियों के साथ आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद सरकार की पुनर्वास नीति के तहत उसे निर्धारित इनाम राशि समेत दूसरी मदद दी गई। सरकार की ओर से उसे ढाई कट्ठा जमीन भी उपलब्ध कराई गई।
कान्हू की जिंदगी के करीब 14 साल नक्सली गतिविधियों में बीते। आत्मसमर्पण के बाद भी उसके खिलाफ दर्ज मामलों के कारण उसे लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। करीब नौ साल तक चली इस लड़ाई के बाद अब वह अपने घर और परिवार के बीच लौट आया है।


