New Delhi. रेलवे मंत्रालय ने अपने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को निर्देश दिया है कि वे कैग की उन रिपोर्ट पर अद्यतन जवाब दें जिनमें देश के कई स्टेशनों पर पानी के कूलरों में ‘ई कोलाई’ जैसे हानिकारक बैक्टीरिया पाये जाने और यात्री सुविधाओं में गंभीर कमियों का जिक्र है। नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) ने सभी रेलवे क्षेत्रीय कार्यालयों के 512 स्टेशनों का ऑडिट किया और 458 स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं में गंभीर कमियां पाईं। यह रिपोर्ट 12 अगस्त को संसद में पेश की गई। मंत्रालय ने नौ सितंबर के अपने पत्र में अनुच्छेद नंबरों का ज़िक्र करते हुए कहा, “…सभी क्षेत्रीय रेलवे से अनुरोध है कि वे ऑडिट की टिप्पणियों पर अद्यतन जानकारी (हर अनुच्छेद के हिसाब से) या की गई कार्रवाई की स्थिति उपलब्ध कराएं।”
पत्र में कहा गया, जरूरी जानकारी कृपया 11 सितंबर तक इस कार्यालय को ज़रूर भेज दी जाए।” मंत्रालय ने एक ईमेल पता भी दिया है और कहा कि इस पर ‘सॉफ्ट कॉपी भेजी जा सकती है। पत्र में यह भी कहा गया, इसे ज़रूरी काम माना जाए।” कैग की ऑडिट रिपोर्ट में पेयजल, बैठने की जगह, शौचालय, प्लेटफॉर्म शेल्टर, पंखे, ‘वॉटर कूलर’ और साइनबोर्ड जैसी एक या ज़्यादा ‘न्यूनतम ज़रूरी सुविधाओं’ बड़ी कमियां पाई गईं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ज़्यादा आय और ज़्यादा यात्रियों की आवाजाही वाले स्टेशनों पर भी सुविधाओं में काफी कमियां देखी गईं। इसमें स्टेशन के ‘वॉटर कूलर’ के पेयजल में कुल ‘कोलीफॉर्म बैक्टीरिया’ (ई. कोलाई समेत) की मौजूदगी, खराब शौचालय और शौचालयों एवं पेशाबघर में गंदगी जैसी कई समस्याओं का जिक्र है।
ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है, ‘पेयजल में बची हुई क्लोरीन, बैक्टीरिया और रसायन की जांच में कमी पाई गई। पेयजल में क्लोरीन का स्तर कम या ज़्यादा होना, टोटल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया (जिसमें ई-कोलाई बैक्टीरिया भी शामिल हैं) की मौजूदगी और पैमानों के आधार पर की गई जांच में कमियों से पता चलता है कि स्टेशनों पर पीने के पानी की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है।’’
इसमें कहा गया, 2022-23 के दौरान आठ क्षेत्र के 49 स्टेशनों और 2023-24 के दौरान नौ क्षेत्र के 56 स्टेशनों के प्लेटफ़ॉर्म पर लगे नलों से लिए गए पीने के पानी के सैंपल की जांच के नतीजों से पता चला कि उनमें टोटल कोलीफ़ॉर्म बैक्टीरिया (जिसमें ई. कोलाई भी शामिल है) मौजूद थे।’’
ई. कोलाई एक प्रकार का बैक्टीरिया है, जो सामान्यतः मनुष्यों और जानवरों की आंतों में पाया जाता है, लेकिन इससे कुछ प्रकार बीमारियां पैदा हो सकती हैं।


