आदित्यपुर. सरायकेला-खरसावां जिले के औद्योगिक नगर आदित्यपुर स्थित मेडिट्रीना अस्पताल के आईसीयू (ICU) वार्ड में शुक्रवार की सुबह अचानक आग लग गई. प्राथमिक जांच में हादसे का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है. राहत की बात यह रही कि अस्पताल प्रशासन और दमकल विभाग की त्वरित कार्रवाई से सभी मरीजों को समय रहते सुरक्षित निकाल लिया गया और बड़ा हादसा टल गया. हालांकि, इस घटना ने एक बार फिर देश भर के अस्पतालों में मौजूद अग्नि सुरक्षा इंतजामों की ओर ध्यान आकर्षित किया है.
अस्पताल प्रबंधन के राजीव कुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि आग शार्ट सर्किट से लगी है, जिससे कि आईसीयू को भारी नुकसान पहुंचा है. हालांकि सभी मरीज सुरक्षित है उन्हें समय रहते मरीजों को दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर लिया गया था. अस्पताल में उपलब्ध फायर सेफ्टी उपकरण से आग बुझाने का प्रयास किया गया. हालांकि आग बढ़ने पर अग्निशमन विभाग की दमकल गाड़ियां पहुंची और करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया है.
कागजों में सिमटी ‘फायर सेफ्टी’, हादसों से सबक नहीं
देश के विभिन्न अस्पतालों में आग लगने की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं. बीते कुछ वर्षों में दिल्ली, मुजफ्फरपुर, मुंबई और राजकोट जैसे शहरों के अस्पतालों में हुए हादसों में दर्जनों मरीजों को अपनी जान गंवानी पड़ी है. आईसीयू या वेंटिलेटर पर मौजूद मरीज गंभीर स्थिति में होने के कारण आपात स्थिति में खुद का बचाव करने में असमर्थ होते हैं, जिससे जोखिम और बढ़ जाता है.
अधिकांश मामलों में आग का मुख्य कारण इलेक्ट्रिकल ओवरलोडिंग और शॉर्ट सर्किट ही पाया गया है. अस्पताल परिसर में नए उपकरण तो बढ़ा दिए जाते हैं, लेकिन नियमित अंतराल पर वायरिंग और बिजली के लोड का सेफ्टी ऑडिट (Safety Audit) न होना एक बड़ी समस्या बना हुआ है.
सुरक्षा में पाई जाने वाली मुख्य कमियां
- फायर एनओसी (NOC) की नियमित समीक्षा न होना: कई अस्पतालों में अग्निशमन विभाग से मिलने वाला सुरक्षा प्रमाण पत्र या तो पुराना होता है या मानकों के अनुरूप नवीनीकृत नहीं कराया जाता.
- आपातकालीन निकास (Fire Exit) में बाधा: मरीजों को स्ट्रैचर या बेड समेत सुरक्षित बाहर निकालने के लिए आवश्यक चौड़े रैंप और एग्जिट मार्ग अक्सर मानक के अनुसार नहीं मिलते.
- कर्मचारियों के प्रशिक्षण का अभाव: आपात स्थिति में अग्निशामक यंत्रों (Fire Extinguisher) के उपयोग और सुरक्षित निकासी (Evacuation) के लिए कर्मचारियों को नियमित मॉक ड्रिल की आवश्यकता होती है.
कड़े ऑडिट और सतर्कता की आवश्यकता
आदित्यपुर की यह घटना भले ही बिना किसी जनहानि के नियंत्रित कर ली गई, लेकिन यह स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े संस्थानों के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी है. प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा अस्पतालों का नियमित फायर व इलेक्ट्रिकल ऑडिट सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है, ताकि भविष्य में इस प्रकार के हादसों की पुनरावृत्ति न हो.
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