- झड़प-खींचतान और पिटाई से Dy SS के बायें कान का पर्दा फटा
- जांच कमेटी खंगालेगी दोनों पक्षों का सच, सीसीटीवी फुटेज लिया
AGRA. आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर RPF (रेलवे सुरक्षा बल) द्वारा उप स्टेशन अधीक्षक (Dy SS) की बर्बरतापूर्वक पिटाई के मामले में नया खुलासा सामने आया है. जिला अस्पताल में ईएनटी स्पेशलिस्ट की मेडिकल जांच में यह बात सामने आयी है कि मारपीट में डिप्टी एसएस नरेंद्र सिंह चाहर के बाएं कान का पर्दा (टायम्पेनिक मेम्ब्रेन लेसरेशन) फट गया है.
मेडिकल रिपोर्ट में कान में सूजन, रक्तस्राव और ठोस वस्तु से गंभीर चोट लगने की बात कही गयी है. स्टेशन पर वायरल वीडियो के बाद से यह खुलासा अनुशासित बल की छवि पर लगे सामाजिक दाग को कानूनी पेचिदगियों में उलझाता नजर आने लगा है. वहीं दूसरी ओर आरपीएफ की ओर से यह बात कही गयी है कि पूरा विवाद ‘चेन पुलिंग’ को लेकर शुरू हुआ था.
आरपीएफ सूत्रों का दावा है कि ‘चेन पुलिंग’ करने वाले यात्रियों को रोकने और नियमानुसार कार्रवाई करने के दौरान डिप्टी एसएस के हस्तक्षेप-दुर्व्यवहार और अपशब्द ने विवाद को बढ़ाया. यही घटना का कारण बना.
हालांकि चर्चित मामले में तीन सदस्यीय हाई-लेवल कमेटी ने जांच शुरू कर दी है. दोनों पक्षों के बयान और तकनीकी साक्ष्य जुटाये जा रहे है. सीसीटीवी फुटेज और वायरल वीडियो के जरिए हाई-लेवल कमेटी Dy SS की पिटाई के सच पर बेनकाब करेगी.
क्या है पूरा मामला?
यह घटना रविवार सुबह करीब 10:51 बजे की है, जब अमृतसर से विशाखापट्टनम जा रही हीराकुंड एक्सप्रेस आगरा कैंट के प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर आकर रुकी. इसी दौरान एक महिला यात्री कुछ खरीदने के लिए नीचे उतरी, लेकिन तभी ट्रेन चलने लगी. महिला को चलती ट्रेन में चढ़ने का जोखिम उठाते देख मौजूद डिप्टी एसएस नरेंद्र सिंह चाहर ने गार्ड को इसकी सूचना देकर ट्रेन रुकवाई.
आरोप है कि वहां तैनात आरपीएफ कर्मियों ने इसे ‘चेन पुलिंग’ का मामला मानकर महिला यात्री और उसके साथी को जबरन नीचे उतार लिया. उनके साथ बदसलूकी करने लगे. डिप्टी एसएस नरेंद्र सिंह चाहर ने आरपीएफ कर्मियों को समझाने और मामला शांत करने का प्रयास किया, तो आरपीएफ कर्मी उनसे उलझ गये और उन्हें जबरन पोस्ट ले जाने लगे.
ऑफिस से घसीटकर ले गए, जमकर पीटा
वायरल वीडियो में जो दिखा उसके अनुसार लगभग 5 से 6 आरपीएफ जवानों ने डिप्टी एसएस चाहर को उनके ऑफिस से घसीटकर बाहर निकाला और पीटते हुए आरपीएफ पोस्ट तक ले गए. यह वीडियो लगातार सोशल मीडिया पर वायरल होता रहा. इससे आरपीएफ ने अनुशासित बल के दावे और अपनी सफाई देने का सामाजिक अवसर खो दिया. अब उन्हें जांच कमेटी के सामने अपनी बात साबित करनी होगी.
अब तक क्या हुई कार्रवाई
घटना के सामने आने के बाद स्थानीय सांसद राजकुमार चाहर ने भी डीआरएम से मिलकर रोष जताया. सरकार की छवि का हवाला दिया और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की. फिलहाल इस मामले में दो एएसआई (ASI) समेत चार आरपीएफ कर्मियों को निलंबित किया जा चुका है. जीआरपी ने प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. वहीं जांच कमेटी भी तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू कर चुकी है.
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