रांची. झारखंड की राजनीति के एक कद्दावर स्तंभ और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मन्नान मलिक का मंगलवार सुबह रांची के एक अस्पताल में निधन हो गया. वे 83 वर्ष के थे और लंबे समय से फेफड़ों के संक्रमण से पीड़ित थे. अस्पताल के आईसीयू में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके निधन से पूरे राज्य और कांग्रेस पार्टी में शोक की लहर दौड़ गई है.
सादगी और जनसेवा से भरा राजनीतिक सफर
मन्नान मलिक दो दशकों से अधिक समय तक झारखंड की सक्रिय राजनीति का हिस्सा रहे. उन्होंने वर्ष 2009 के विधानसभा चुनाव में धनबाद सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राज सिन्हा को बेहद कड़े मुकाबले में हराकर जीत दर्ज की थी. इस जीत के बाद उन्हें राज्य सरकार में पशुपालन, मत्स्य पालन और आपदा प्रबंधन विभाग का मंत्री बनाया गया था. हालांकि, इसके बाद 2014 और 2019 के चुनावों में उन्हें राज सिन्हा से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन जनता के बीच उनकी पकड़ हमेशा मजबूत रही.
कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने शोक व्यक्त करते हुए कहा:
“मलिक जी ने अपना पूरा जीवन जनसेवा, सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए समर्पित कर दिया. उनकी सादगी और ईमानदारी हमेशा याद रखी जाएगी.”
जीवन के अंतिम पड़ाव पर अदालती फैसले का साया
मन्नान मलिक के जीवन के आखिरी दिन कानूनी विवादों के साये में बीते. उनके निधन से ठीक चार दिन पहले, 10 जुलाई को धनबाद की एक विशेष अदालत ने उन्हें वर्ष 2011 के चर्चित मटकुरिया गोलीकांड मामले में दोषी ठहराते हुए तीन साल की सजा सुनाई थी. यह मामला अप्रैल 2011 में बीसीसीएल की जमीन से अतिक्रमण हटाने के दौरान भड़की हिंसा और पुलिस फायरिंग से जुड़ा था, जिसमें चार लोगों की मौत हुई थी.
सजा मिलने के महज चार दिन बाद उनके निधन से समर्थकों में गहरा दुख है. मन्नान मलिक का जाना झारखंड की राजनीति में एक अपूरणीय शून्य छोड़ गया है.
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