नई दिल्ली: भारतीय उद्योग जगत और महिला नेतृत्व के इतिहास में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है. फॉर्च्यून इंडिया द्वारा साल 2026 के लिए जारी देश की ‘सबसे शक्तिशाली महिलाओं’ (Most Powerful Women) की नई सूची ने एक साफ और कड़ा संदेश दिया है—भारत में प्रभाव और ताकत का केंद्र अब सियासत के गलियारों से निकलकर कॉर्पोरेट बोर्डरूम, अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी और बिजनेस एम्पायर की तरफ मजबूती से शिफ्ट हो चुका है.
यही वजह है कि साल 2025 की सूची में शीर्ष पर रहने वालीं देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बार पीछे छूट गई हैं, और उनकी जगह रिलायंस फाउंडेशन की चेयरपर्सन नीता अंबानी ने नंबर वन का ताज अपने नाम कर लिया है.
समाज सेवा, शिक्षा और स्वास्थ्य के दम पर नीता अंबानी नंबर-1
साल 2020 से लगातार इस सूची के टॉप-2 में दबदबा बनाए रखने वालीं नीता अंबानी अब देश की सबसे शक्तिशाली महिला बनकर उभरी हैं. शिक्षा, खेल और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनके बढ़ते प्रभाव ने उन्हें इस मुकाम पर पहुंचाया है. लेकिन नीता अंबानी यहीं रुकने वाली नहीं हैं; उन्होंने साल 2035 तक अपने सामाजिक कार्यों के दायरे और प्रभाव को 5 गुना बढ़ाने का एक बड़ा लक्ष्य रखा है. इसके तहत देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में एक भव्य 2000 बेड की ‘मेडिकल सिटी’ और एक अत्याधुनिक नया मेडिकल कॉलेज बनाने की उनकी योजना पर काम चल रहा है.
रोशनी नाडर की ‘एआई’ छलांग और रेड्डी सिस्टर्स का ‘डिजिटल’ प्रहार
सूची में दूसरे स्थान पर एचसीएलटेक (HCLTech) की चेयरपर्सन रोशनी नाडर का नाम है, जिन्होंने पिछले 5 सालों में कामयाबी की असाधारण इबारत लिखी है. साल 2022 में जो रोशनी 21वें पायदान पर थीं, वे आज सीधे दूसरे नंबर पर आ चुकी हैं. उनके विजनरी नेतृत्व में कंपनी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्लाउड सेवाओं पर जो बड़ा दांव लगाया था, वह रंग ला रहा है. आज कंपनी का AI बिजनेस अकेले 5000 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है.
वहीं दूसरी तरफ, अपोलो हॉस्पिटल्स समूह को देश का सबसे बड़ा मेडिकल ब्रैंड बनाने वाली चार बहनों—सुनीता रेड्डी, शोभना कामिनेनी, संगीता रेड्डी और प्रीथा रेड्डी (रेड्डी सिस्टर्स) ने भी अपनी मजबूत पकड़ बनाई हुई है. देश के कोने-कोने तक डिजिटल हेल्थकेयर पहुंचाने वाली इन बहनों के डिजिटल प्लेटफॉर्म से आज 3.5 करोड़ से ज्यादा यूजर्स जुड़े हुए हैं.
गैराज से ग्लोबल तक, किरण मजूमदार-शॉ और प्रिया नायर का कमाल
यह सूची उन जांबाज महिलाओं की भी तस्दीक करती है जिन्होंने शून्य से शिखर तक का सफर तय किया. बायोकॉन की नींव रखने वाली किरण मजूमदार-शॉ आज भी महिला उद्यमियों के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा हैं, जिन्होंने 1970 के दशक में महज 25 साल की उम्र में एक छोटे से गैराज से शुरुआत की और भारत को बायोटेक की दुनिया में वैश्विक पहचान दिलाई.
इस साल की लिस्ट का सबसे चौंकाने वाला नाम प्रिया नायर का है, जिन्होंने 73वें स्थान से सीधे लंबी छलांग लगाकर टॉप-10 (आठवां स्थान) में एंट्री मारी है. लगभग 30 साल पहले हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) में एक मामूली ‘मैनेजमेंट ट्रेनी’ के तौर पर अपना करियर शुरू करने वाली प्रिया आज उसी कंपनी की एमडी और सीईओ के पद पर काबिज हैं. उनका मानना है कि भारत के विविधता भरे बाजार और हर वर्ग के ग्राहक को समझने के लिए एक बिल्कुल अलग और जमीनी रणनीति की जरूरत होती है.
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