जमशेदपुर. लौहनगरी जमशेदपुर में जब कानून के रखवालों की चौकसी पर अपराधी भारी पड़ जाएं, तो न्याय की उम्मीदें अदालत की चौखट पर आकर ही दम लेती हैं. कुछ ऐसा ही नजारा बुधवार दोपहर जमशेदपुर व्यवहार न्यायालय में देखने को मिला.
बिष्टुपुर के चर्चित हिमांशु सिंह हत्याकांड का मुख्य आरोपी और झारखंड पुलिस की फाइलों में ‘मोस्ट वांटेड’ बन चुका विश्वजीत मंडल उर्फ बोदरा पुलिस को खुलेआम चकमा देकर कोर्ट परिसर पहुंचा और आत्मसमर्पण कर दिया. जिस अपराधी को दबोचने के लिए पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) दिन-रात छापेमारी का दावा कर रही थी और जिस पर 2 लाख रुपये का भारी-भरकम इनाम घोषित था, उसने बेहद खामोशी से अदालत में सरेंडर कर खाकी की खुफिया तंत्र की पोल खोल कर रख दी.
जब पुलिस की मौजूदगी में दहल उठी थी लौहनगरी
जमशेदपुर की इस खूनी दास्तान की शुरुआत बीती 27 जून की रात को हुई थी. बिष्टुपुर स्थित डबल डाउन बार के बाहर अपराधियों ने दुस्साहस की सारी हदें पार करते हुए हिमांशु सिंह की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी थी. सनसनीखेज बात यह थी कि इस वारदात को उस वक्त अंजाम दिया गया जब पास में ही पुलिस बल मौजूद था. पुलिस की नाक के नीचे हुए इस हाई-प्रोफाइल मर्डर ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया और जमशेदपुर की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए.
एसआईटी की कड़ाई के बीच ‘बोदरा’ का मास्टरस्ट्रोक
हत्याकांड के बाद चौतरफा दबाव झेल रही जमशेदपुर पुलिस ने आनन-फानन में एसआईटी का गठन किया. हाल ही में पुलिस ने इस मामले में चार अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके पास से हत्या में इस्तेमाल हथियार और मोटरसाइकिल बरामद करने में सफलता भी पाई थी. लेकिन, इस पूरी साजिश का असली सूत्रधार विश्वजीत मंडल उर्फ बोदरा पुलिस की पकड़ से दूर भागता रहा. पुलिस उसकी कुर्की-जब्ती और संभावित ठिकानों पर दबिश देने की रणनीति बना ही रही थी कि बोदरा ने अपना मास्टरस्ट्रोक खेल दिया. उसे पता था कि पुलिस एनकाउंटर या कड़े पुलिसिया शिकंजे से बचने का एकमात्र रास्ता न्यायिक आत्मसमर्पण ही है.
अब रिमांड और सुलगते सवालों की बारी
बुधवार को बोदरा के कोर्ट में सरेंडर करते ही अदालत ने उसे तुरंत न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया. अब गेंद एक बार फिर जमशेदपुर पुलिस के पाले में है. पुलिस अब आरोपी बोदरा को रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की कानूनी कवायद में जुट गई है.
- इस पूछताछ से कई बड़े राजफाश होने की उम्मीद है:
- आखिर डबल डाउन बार के बाहर हिमांशु सिंह की हत्या की मुख्य वजह क्या थी?
- इस पूरे हत्याकांड की साजिश में पर्दे के पीछे से और कौन से सफेदपोश या अपराधी शामिल हैं?
- फरार रहने के दौरान बोदरा को शहर में किन-किन मददगारों ने पनाह दी?
लोहे के इस शहर में अपराध की यह गाथा एक बार फिर यह सबक दे गई कि अपराधी चाहे जितना भी शातिर क्यों न हो, उसे कानून के दायरे में आना ही पड़ता है; भले ही पुलिस की नाकामी के बाद वह रास्ता खुद अपराधी ने ही क्यों न चुना हो.


