रांची: झारखंड की राजधानी रांची में एक बार फिर संगठित आपराधिक गिरोहों का आतंक खुलकर सामने आ गया है. हालिया मामला बरियातू थाना क्षेत्र के रानीबागान का है, जहाँ कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान के नाम का इस्तेमाल कर एक प्रतिष्ठित रियल एस्टेट कारोबारी बिजेंद्र सिंह से 1 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी गई है. रकम न देने पर कारोबारी और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई है. इस घटना ने एक बार फिर प्रदेश की कानून-व्यवस्था और व्यवसायियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
व्हाट्सएप कॉल से धमकी और रेकी का खौफ
पीड़ित कारोबारी के अनुसार, धमकी की शुरुआत मंगलवार को एक व्हाट्सएप मैसेज से हुई. मैसेज भेजने वाले ने खुद को प्रिंस खान बताते हुए भारी-भरकम राशि की मांग की. डरे-सहमे कारोबारी जब शिकायत दर्ज कराने बरियातू थाना पहुंचे, तो पुलिस के सामने ही उनके मोबाइल पर दोबारा व्हाट्सएप कॉल आई. कॉलर ने एक हफ्ते के भीतर पैसे पहुंचाने की सख्त चेतावनी दी.
इस मामले में सबसे चिंताजनक बात यह है कि अपराधियों ने कारोबारी के परिवार, उनकी दैनिक गतिविधियों और वाहनों से जुड़ी सटीक जानकारियां साझा कीं. इससे साफ है कि वारदात को अंजाम देने से पहले कारोबारी की बकायदा रेकी (Surveillance) की गई थी. फिलहाल, भयभीत परिवार ने पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगाई है और पुलिस तकनीकी साक्ष्यों (Cyber Surveillance) के आधार पर नंबरों की जांच कर रही है.
झारखंड में बढ़ता ‘रंगदारी उद्योग’: हाल के बड़े मामले
यह कोई इकलौती घटना नहीं है. पिछले कुछ महीनों में रांची और आसपास के इलाकों में रंगदारी मांगने के मामलों में अप्रत्याशित बाढ़ आई है, जिसने पूरे व्यापारिक जगत को हिलाकर रख दिया है:
- 5 जून: व्यवसायी उदय शंकर से 5 करोड़ रुपये की मांग.
- 4 जून: सर्राफा कारोबारी सुमन पाल से 5 करोड़ रुपये की रंगदारी.
- 24 जून: कॉस्मेटिक कारोबारी उमाशंकर सिंह को 5 करोड़ रुपये के लिए धमकी.
- अन्य मामले: जलजोगा रेस्टोरेंट के संचालक से 50 लाख और जय हिंद फार्मा के संचालक से 1 करोड़ रुपये की मांग.
एयरपोर्ट रोड टीटोस बार हत्याकांड और गिरोहों का नेटवर्क
झारखंड में प्रिंस खान और अन्य अपराधियों का नाम तब सबसे ज्यादा सुर्खियों में आया था, जब एयरपोर्ट रोड स्थित टीटोस बार में रंगदारी न देने पर एक कर्मचारी की सरेआम हत्या कर दी गई थी. पुलिस जांच में यह स्पष्ट हो चुका है कि ये गैंगस्टर विदेशों या दूसरे राज्यों में बैठकर डिजिटल माध्यमों (इंटरनेट कॉलिंग, वर्चुअल नंबर्स) के जरिए झारखंड के कोयला अंचलों (धनबाद) से लेकर राजधानी रांची तक अपना नेटवर्क चला रहे हैं.
कानून-व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती
ये घटनाएं दर्शाती हैं कि अपराधियों के हौसले किस कदर बुलंद हैं. रंगदारी के इस बढ़ते ग्राफ ने झारखंड के ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (Ease of Doing Business) को गंभीर चोट पहुंचाई है. कारोबारियों में डर का माहौल निवेश और आर्थिक गतिविधियों को धीमा कर सकता है. पुलिस के लिए अब यह पता लगाना सबसे बड़ी चुनौती है कि क्या इन धमकियों के पीछे सच में संगठित गैंग का हाथ है, या छोटे अपराधी इन बड़े गैंगस्टर्स के नाम का खौफ दिखाकर वसूली का नया धंधा चमका रहे हैं. बहरहाल, राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को इन गिरोहों के खिलाफ एक निर्णायक और कड़ा अभियान छेड़ने की तत्काल आवश्यकता है.
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