रायपुर: छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले से एक ऐसी हैरान करने वाली घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को स्तब्ध कर दिया है। जिस बेटे को मृत मानकर परिवार ने नम आंखों से उसका अंतिम संस्कार कर दिया था और सिर मुंडवाकर सारी पारंपरिक रस्में भी पूरी कर ली थीं, वही बेटा 17 दिन बाद जिंदा घर लौट आया। इस अनोखे और चौंकाने वाले वाकये ने न सिर्फ परिजनों को बल्कि पुलिस प्रशासन को भी पशोपेश में डाल दिया है।
क्या था पूरा मामला?
बलौदाबाजार के सुकली बरेली गांव का रहने वाला 28 वर्षीय मोतीलाल विश्वकर्मा लंबे समय से लापता था। परिवार वाले उसे ढूंढ-ढूंढकर थक चुके थे। इसी बीच, पुलिस को सेमरा नाले के पास एक सड़ा-गला अज्ञात शव बरामद हुआ। शव की हालत इतनी खराब थी कि उसकी पहचान करना बेहद मुश्किल था। जब मोतीलाल के परिजनों को इसकी खबर मिली, तो वे मौके पर पहुंचे और शरीर के हुलिए व अन्य आधारों पर उसे अपना ही लापता बेटा समझ बैठे।
परिवार ने बिना किसी शक के शव को घर लाया और रीति-रिवाज के साथ उसका अंतिम संस्कार कर दिया। शोक की इस घड़ी में रिश्तेदारों और परिवार ने बाल मुंडवाकर तेरहवीं और अन्य सभी पारलौकिक रस्में भी पूरी कर लीं, जिससे यह मान लिया गया कि उनकी तलाश हमेशा के लिए खत्म हो चुकी है।
17 दिन बाद हुआ चमत्कार
लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। अंतिम संस्कार के कुछ ही दिनों बाद, 14 अगस्त को धमतरी जिले के संबलपुर मोड़ के पास एक पेट्रोल पंप पर मोतीलाल जिंदा और सही सलामत बैठा मिला। वह मानसिक रूप से परेशान था। वहां मौजूद ‘वरदान परमार्थ सेवा समिति’ और ‘इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी’ के सदस्यों ने उसकी सुध ली। जब अस्पताल में उसकी काउंसलिंग और दस्तावेजों की जांच की गई, तो उसकी असली पहचान बलौदाबाजार के मोतीलाल के रूप में सामने आई।
अब खड़ा हुआ बड़ा सवाल
जब पुलिस और स्वयंसेवकों ने जिंदा मोतीलाल के मिलने की सूचना उसके परिजनों को दी, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। घर में मातम की जगह अचानक खुशी और आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। बेटा तो सही-सलामत वापस लौट आया, लेकिन अब इस पूरे मामले ने एक बड़ा और गंभीर रहस्य खड़ा कर दिया है कि आखिर परिवार ने जिस अज्ञात शव का इतने विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया था, वह बदनसीब शख्स कौन था? पुलिस अब इस गुत्थी को सुलझाने में जुटी है।


