रांची. झारखंड के प्रशासनिक गलियारों में एक बार फिर से भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामलों ने तूल पकड़ लिया है। पूर्व गृह सचिव एनएन पांडेय (NN Pandey) के खिलाफ चल रहे आय से अधिक संपत्ति के बहुचर्चित मामले में लोकायुक्त कार्यालय ने सख्ती दिखाते हुए मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग के प्रधान सचिव को समन भेजा है। लोकायुक्त कार्यालय के इस सख्त रुख से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
पांच नवंबर को रिपोर्ट पेश करने का निर्देश
लोकायुक्त कार्यालय द्वारा जारी किए गए निर्देश के अनुसार, मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग के प्रधान सचिव को आगामी पांच नवंबर को सुबह 11 बजे स्वयं या अपने किसी प्राधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से लोकायुक्त के समक्ष उपस्थित होना होगा। उन्हें पूर्व गृह सचिव एनएन पांडेय के विरुद्ध अब तक की गई कार्रवाई की अद्यतन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का कड़ा निर्देश दिया गया है। यह पूरा समन पिछले साल 14 अक्टूबर को जारी किया गया था, जिसके बाद से इस मामले की फाइल पर दोबारा तेजी से काम शुरू हो गया है।
क्या है पूरा मामला?
इस मामले की शुरुआत 21 अगस्त 2017 को हुई थी, जब लोकायुक्त कार्यालय में एनएन पांडेय के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों को लेकर एक लिखित शिकायत दर्ज कराई गई थी। प्रारंभिक शिकायतों के आधार पर लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को इस मामले में प्रारंभिक जांच (PE) दर्ज कर तीन सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया था।
शिकायतकर्ता का मुख्य आरोप था कि अपने कार्यकाल के दौरान गृह सचिव पद पर रहते हुए एनएन पांडेय ने अपने पद और अधिकारों का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया और अकूत अवैध संपत्ति बनाई। शिकायत के साथ उनकी अचल संपत्ति से जुड़े कई दस्तावेज और जानकारियां भी साझा की गई थीं।
अनुमति के अभाव में अटकी रही जांच
एसीबी ने इस मामले में प्रारंभिक जांच से पहले एक आसूचना रिपोर्ट (IR) तैयार की थी। इसके बाद पीई दर्ज करने और आगे की कानूनी प्रक्रिया बढ़ाने के लिए एसीबी ने मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग से आधिकारिक अनुमति मांगी थी। हालांकि, विभाग की ओर से लगातार पत्राचार करने के बावजूद अब तक अनुमति नहीं मिल सकी है। एसीबी ने जब-जब सरकार से अनुमति मांगी, उसकी एक प्रति लोकायुक्त कार्यालय को भी भेजी थी। अब लोकायुक्त ने इसी बात पर संज्ञान लेते हुए विभाग से जवाब मांगा है कि उन पत्रों के आधार पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
वर्ष 2016 में हो चुके हैं सेवानिवृत्त
गौरतलब है कि पूर्व गृह सचिव एनएन पांडेय वर्ष 2016 में सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनके रिटायरमेंट के ठीक बाद उनके खिलाफ भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति अर्जित करने की शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। करीब पांच साल तक यह मामला ठंडे बस्ते में रहने के बाद, लोकायुक्त के रूप में सेवानिवृत्त जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता द्वारा अप्रैल महीने में पदभार ग्रहण करने के बाद से सभी पुरानी और लंबित फाइलों की समीक्षा शुरू की गई है। इसी कड़ी में एनएन पांडेय से जुड़ी इस संवेदनशील फाइल को भी दोबारा खोलकर रिपोर्ट तलब की गई है।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में लोकायुक्त की सख्ती से यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में नौकरशाही और प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया और अधिक तेज होने वाली है। पांच नवंबर को होने वाली सुनवाई के बाद इस मामले में कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है।


