नई दिल्ली: देश के सबसे प्रतिष्ठित और बड़े औद्योगिक घरानों में शुमार टाटा ग्रुप के भीतर नेतृत्व और भविष्य की रणनीतियों को लेकर मतभेद गहराते जा रहे हैं। हाल ही में टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन और टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा के बीच रिश्तों में जमी बर्फ को पिघलाने के लिए एक गुप्त बैठक का आयोजन किया गया था। हालांकि, तमाम कोशिशों के बावजूद यह उच्च-स्तरीय बैठक पूरी तरह से बेनतीजा साबित हुई।
नोएल टाटा के आवास पर हुई थी बैठक
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस महत्वपूर्ण और गोपनीय बैठक का आयोजन लंबे समय से टाटा समूह से जुड़े रहे एन.ए. सूनावाला द्वारा किया गया था। यह मुलाकात नोएल टाटा के आवास पर हुई, जिसका मुख्य उद्देश्य टाटा समूह के शीर्ष नेतृत्व के बीच चल रहे गतिरोध को समाप्त करना था। इस बैठक के एजेंडे में मुख्य रूप से टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग, कंपनी में शापूरजी पालनजी (SP) ग्रुप की हिस्सेदारी खरीदने का प्रस्ताव और एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल को आगे बढ़ाने जैसे संवेदनशील मुद्दे शामिल थे।
हालांकि, 25 अक्टूबर को हुई इस बैठक के अंत में दोनों पक्षों के बीच आगे भी बातचीत जारी रखने पर सहमति बनी थी, लेकिन यह शांति ज्यादा दिन नहीं टिक सकी। इसके ठीक अगले ही दिन नोएल टाटा ने एक कड़ा पत्र जारी कर दिया। इस पत्र के जरिए उन्होंने 17 सितंबर को हुई टाटा संस की बोर्ड बैठक में लिए गए कई महत्वपूर्ण फैसलों को खुली चुनौती दे डाली। उन्होंने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति की प्रक्रिया, वोटिंग की शर्तों पर गंभीर सवाल उठाए और भविष्य में हितों के टकराव की आशंका भी जताई।
लिस्टिंग और पुनर्नियुक्ति पर आम सहमति का अभाव
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैठक के दौरान एन. चंद्रशेखरन ने स्पष्ट किया कि टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध (List) करने का निर्णय पूरी तरह से उनके निजी नियंत्रण में नहीं है। यह कदम भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नियामक और विनियामक जरूरतों के तहत अनिवार्य है। इस मसले पर समूह के भीतर अलग-अलग राय है; जहां एसपी ग्रुप टाटा संस की लिस्टिंग का जोरदार समर्थन कर रहा है, वहीं टाटा ट्रस्ट्स इसके सख्त खिलाफ है और अन्य विकल्पों पर विचार करने की बात कह रहा है।
इसके अलावा, नोएल टाटा ने एन. चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति पर भी आपत्ति जताई और सुझाव दिया कि उन्हें 65 वर्ष की आयु पूरी होने पर सेवानिवृत्त हो जाना चाहिए। इसके जवाब में चंद्रशेखरन का कहना था कि वे कंपनी की नीतियों का पूरा सम्मान करेंगे, लेकिन वर्तमान में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, एयर इंडिया और टाटा डिजिटल जैसे कई बड़े और दूरगामी प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं, जिन्हें वे अपनी देखरेख में सफलतापूर्क पूरा करना चाहते हैं।
कानूनी लड़ाई के संकेत
इस उच्च-स्तरीय विवाद के और तूल पकड़ने की पूरी आशंका है। सूत्रों का यहां तक कहना है कि यदि दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से कोई ठोस समाधान नहीं निकलता है, तो नोएल टाटा इस पूरे मामले को लेकर अदालत का रुख भी कर सकते हैं। टाटा समूह के भीतर चल रहा यह अंदरूनी घमासान आने वाले दिनों में और अधिक तूल पकड़ सकता है, जिस पर देश भर के बाजार और उद्योग जगत की पैनी नज़र बनी हुई है।


