धनबाद. भारतीय साहित्य और संस्कृति के पन्नों में झारखंड के धनबाद जिले ने एक नया और स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है। धनबाद की प्रख्यात लेखिका और साहित्यकार डॉ. मीतू सिन्हा ने एक वर्ष के भीतर रामायण पर आधारित 11 अनूठी पुस्तकों की रचना करके लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज करा लिया है। उनकी इस शानदार उपलब्धि से न केवल उनके गृह नगर धनबाद, बल्कि पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा हो गया है।
विविध और अनूठे विषयों का अनूठा संगम
डॉ. मीतू सिन्हा ने अपनी इन पुस्तकों के माध्यम से रामायण के विभिन्न पात्रों और प्रसंगों को एक बिल्कुल नए और तार्किक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया है। उनके द्वारा रची गई इन 11 पुस्तकों में 11 अलग-अलग रंगों और भावनाओं का गहरा समावेश देखने को मिलता है।
उनकी प्रमुख कृतियों में ‘भरत के राम’ एक उत्कृष्ट प्रबंध काव्य है, जो भगवान राम और उनके छोटे भाई भरत के बीच के अनुपम प्रेम को दर्शाता है। इसके अलावा, मर्यादा की मिसाल पेश करता ‘सिया स्वयंवर’ खंड काव्य, राम और रावण के संघर्ष की दिशा बदलने वाला ‘अंगद रावण संवाद’, तथा पाठकों को निराशा से आशा की ओर ले जाने वाली पुस्तक ‘संजीवनी बूटी’ बेहद चर्चित हो रही हैं।
ऐतिहासिक नारी पात्रों और कथाओं का सूक्ष्म चित्रण
डॉ. मीतू की कृतियों में रामायण के उन पक्षों पर भी गहराई से प्रकाश डाला गया है, जिन पर कम ही चर्चा होती है।
सती सुलोचना: यह उत्तर भारत का पहला ऐसा प्रबंध काव्य माना जा रहा है, जिसमें सुलोचना और मेघनाद के गाढ़े प्रेम का वर्णन किया गया है।
लक्ष्मण की उर्मिला: यह खंड काव्य सीधे तौर पर उर्मिला के त्याग और उनके मन की व्यथा की बात करता है।
राम कथा: गद्य विधा में लिखी गई इस पुस्तक में प्रभु श्रीराम के मन की गहराई और उनके आंतरिक भावों का बेहद सुंदर चित्रण किया गया है।
इसके अलावा ‘पंचवटी प्रसंग’, ‘नागपाश’, ‘बाली संहार’ और ‘कुंभकर्ण वध’ जैसी रचनाओं में भी घटनाओं का सजीव और मार्मिक वर्णन मिलता है।
वैश्विक स्तर पर मिला सर्वोच्च सम्मान
लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज होने के साथ ही डॉ. मीतू सिन्हा को प्रतिष्ठित प्रमाण पत्र, स्मृति चिन्ह और पदक से सम्मानित किया गया है। उनकी इस महान उपलब्धि पर प्रतिष्ठित लंदन हेराल्ड पत्रिका में भी एक विशेष लेख प्रकाशित किया गया है। उल्लेखनीय है कि लंदन रिकॉर्ड के साथ-साथ उनका नाम एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और ओंग बुक of रिकॉर्ड्स में भी दर्ज किया जा चुका है।
अपने विविध विषयों पर कुल 26 पुस्तकें लिख चुकीं डॉ. मीतू का यह कीर्तिमान आने वाली पीढ़ियों और युवा लेखकों के लिए एक बड़ी प्रेरणा स्रोत बनेगा।


