जमशेदपुर. लौहनगरी में कानून-व्यवस्था की स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है. एक तरफ जहां शहर में अपराधी पूरी तरह बेलगाम हो चुके हैं, वहीं दूसरी तरफ पुलिस प्रशासन अपनी असफलताओं और खीझ का गुबार आम जनता पर निकालता दिख रहा है.
बीते दिन बिष्टुपुर थाना क्षेत्र समेत शहर के विभिन्न संवेदनशील इलाकों में पुलिस द्वारा चलाया गया ‘विशेष अभियान’ अब एक गंभीर सामाजिक और प्रशासनिक सवाल बनकर उभर सामने आया है. सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें पुलिस सड़कों और चौराहों पर मौजूद लोगों को लाठियों से खदेड़ती नजर आ रही है.
अपराधियों पर नरमी, आम जनता पर लाठियां
शहर में लगातार हो रही आपराधिक घटनाओं, चाहे वह दिन-दहाड़े बैंक डकैती हो, दर्जनों घरों व दुकानों में चोरी का सिलसिला हो, या फिर शहर के अलग-अलग कोनों में बेखौफ अंदाज में हो रही फायरिंग की वारदातें, ने पुलिसिया तंत्र की पोल खोलकर रख दी है. इन बड़ी वारदातों के मुख्य आरोपी आज भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं.
सवाल यह उठता है कि क्या पुलिस ने कभी किसी खूंखार अपराधी या डकैत पर सड़कों पर इस तरह डंडे बरसाने की जुर्रत दिखाई है? जवाब नकारात्मक है. लेकिन जब बात आम राहगीरों और नागरिकों की आती है, तो वही पुलिस सरेराह अपना रौब जमाने और लाठियां बरसाने से पीछे नहीं हटती.
हुड़दंग पर नियंत्रण के नाम पर बर्बरता क्यों?
रात के समय अड्डेबाजी और हुड़दंग करने वालों पर कार्रवाई से किसी को ऐतराज नहीं हो सकता. शांति-व्यवस्था बनाए रखने के लिए गश्ती जरूरी है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर बिना किसी पूर्व सूचना या चेतावनी के आम नागरिकों पर लाठियां बरसाना पुलिस की बेचैनी और प्रशासनिक नाकामी को ही दर्शाता है.
यदि पुलिस को लगता है कि रात में लोगों का सड़कों पर निकलना प्रतिबंधित है, तो इसके लिए विधिवत सार्वजनिक सूचना या धारा-144 जैसी गाइडलाइंस जारी की जानी चाहिए थी. घरों को लौट रहे निर्दोष राहगीरों और आम जनता को अपराधी समझकर पीटना किसी भी तरह से न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता.
शासन की चुप्पी और राजनीति का मौन
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चिंताजनक पहलू सरकार की चुप्पी और स्थानीय राजनीतिक दलों का मौन है. कानून-व्यवस्था का पुलिस के हाथों से फिसलना और खाकी का बेबस महसूस करना केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक चुनौती है.
यह राजनीतिक नेतृत्व के लिए भी एक बड़ा सबक है कि आखिर क्यों शहर का सुरक्षा चक्र ध्वस्त हो रहा है? क्यों खाकी का खौफ अपराधियों के बजाय आम नागरिकों के दिलों में बैठता जा रहा है?
जनता में पनप रहा आक्रोश, SSP से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
पुलिस के इस कृत्य से शहरवासियों के बीच एक बेहद नकारात्मक और गंभीर संदेश जा रहा है. आम जनता में यह भावना घर कर रही है कि पुलिस असली अपराधियों को पकड़ने में नाकाम रहने के बाद अपनी विफलता छिपाने के लिए आम लोगों को निशाना बना रही है.
समय रहते अगर इस कार्यशैली पर रोक नहीं लगाई गई, तो पुलिस प्रशासन जनता का विश्वास पूरी तरह खो देगा. जमशेदपुर के वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) को इस मामले में तत्काल संज्ञान लेते हुए दोषी पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय करनी चाहिए और ऐसे मनमाने अभियानों पर तुरंत लगाम लगानी चाहिए, ताकि कानून का राज स्थापित हो सके, न कि लाठी का.



