रांची: झारखंड में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों तक समय पर इलाज पहुँचाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. प्रदेश में जल्द ही 720 नई एंबुलेंस का बेड़ा सड़कों पर दौड़ता नज़र आएगा. इसके साथ ही गंभीर मरीजों के त्वरित परिवहन के लिए हेलीकॉप्टर (एयर एंबुलेंस) सेवा को भी कैबिनेट से हरी झंडी मिल चुकी है.
इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य दुर्घटना पीड़ितों और गंभीर रूप से बीमार मरीजों को बिना किसी देरी के ‘गोल्डन आवर’ में नजदीकी अस्पताल पहुँचाना है.
एंबुलेंस बेड़े का स्वरूप और तकनीकी वर्गीकरण
स्वास्थ्य विभाग द्वारा अधिग्रहित की जाने वाली 720 एंबुलेंसों को तीन मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया है, ताकि हर स्तर की चिकित्सा आवश्यकता को पूरा किया जा सके:
- 400 पेशेंट ट्रांसपोर्ट व्हीकल (PTV): इनका उपयोग प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) से मरीजों को स्थानांतरित करने के लिए होगा.
- 270 बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) एंबुलेंस: प्राथमिक चिकित्सा और सामान्य आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए सुसज्जित.
- 20 एडवांस लाइफ Support (ALS) एंबुलेंस: वेंटिलेटर और जीवन रक्षक उपकरणों से लैस, जिन्हें गंभीर मरीजों के लिए तैनात किया जाएगा. (इसके अतिरिक्त 30 अन्य ALS एंबुलेंस की खरीद प्रक्रिया पहले से जारी है.)
संचालन और प्रबंधन की पारदर्शी व्यवस्था
एंबुलेंस सेवा के सुचारू संचालन के लिए स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए हैं:
- टेंडर प्रक्रिया: स्वास्थ्य विभाग एक माह के भीतर सभी टेंडर प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए मुस्तैदी से काम कर रहा है.
- स्थानीय स्तर पर PTV संचालन: PTV एंबुलेंस का संचालन CHC और PHC के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों द्वारा आउटसोर्सिंग के माध्यम से कराया जाएगा. इसके लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की ओर से प्रति वाहन ₹50,000 प्रतिमाह दिए जाएंगे.
- सदर एवं मेडिकल कॉलेज में ALS: एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस को राज्य के सभी सदर अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में उपलब्ध कराया जाएगा, जिसका सीधा प्रबंधन अस्पताल प्रशासन के हाथों में होगा.
उपयोग अवधि एवं सख्त निगरानी
वाहनों की गुणवत्ता और कार्यकुशलता बनाए रखने के लिए समय-सीमा निर्धारित की गई है. ALS और BLS एंबुलेंस की उपयोग अवधि साढ़े छह वर्ष या 1.50 लाख किलोमीटर तय की गई है, जबकि PTV एंबुलेंस के लिए यह अवधि 5 वर्ष या 1 लाख किलोमीटर होगी.
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के अनुसार, सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो, इसके लिए मुख्यालय स्तर से नियमित डिजिटल निगरानी की व्यवस्था की जाएगी.
झारखंड सरकार के इस कदम से न केवल शहरी क्षेत्रों, बल्कि राज्य के सुदूर जनजातीय और ग्रामीण अंचलों में रहने वाले लोगों को भी समय पर जीवनरक्षक स्वास्थ्य सुविधा मिलना संभव हो सकेगा.



